मंईयां सम्मान योजना वेरिफिकेशन में बड़ा खेला, 8500 की जांच में एक भी अयोग्य नहीं?

Maiya Samman Yojana: जामताड़ा के नारायणपुर प्रखंड में मंईयां सम्मान योजना के सत्यापन पर सवाल उठे हैं. 8500 लाभुकों की जांच के बावजूद एक भी अयोग्य नहीं मिलने पर प्रशासन ने गड़बड़ी की आशंका जताई है. प्रभारी बीडीओ ने दोबारा जांच और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

जामताड़ा से निकेश कुमार की रिपोर्ट

Maiya Samman Yojana: झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी मंईयां सम्मान योजना के लाभुकों के सत्यापन को लेकर जामताड़ा जिले के नारायणपुर प्रखंड में बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. योजना के तहत लाभुकों के भौतिक सत्यापन का काम तेजी से चल रहा है, लेकिन अब तक हुई जांच में एक भी अयोग्य लाभुक नहीं मिलने से प्रशासनिक स्तर पर संदेह गहराने लगा है. नारायणपुर प्रखंड में योजना के लगभग 34 हजार लाभुक हैं. पंचायत स्तर पर इन सभी लाभुकों का भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है. अब तक विभिन्न पंचायतों में करीब 8500 लाभुकों का सत्यापन पूरा हो चुका है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जांच में अब तक एक भी लाभुक अयोग्य नहीं पाया गया है.

जिम्मेदारी कई कर्मियों को दी गई

योजना के लाभुकों के सत्यापन की जिम्मेदारी पंचायत सचिव, आंगनबाड़ी सेविका, विद्यालय शिक्षक, सहिया और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को दी गई है. इन सभी को घर-घर जाकर लाभुकों की स्थिति की जांच करनी है और यह सुनिश्चित करना है कि योजना का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंच रहा है या नहीं. सरकार की मंशा है कि केवल पात्र महिलाओं को ही योजना का लाभ मिले. इसी उद्देश्य से भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है, ताकि फर्जी या अपात्र लाभुकों को सूची से हटाया जा सके. लेकिन बड़ी संख्या में जांच होने के बावजूद एक भी अयोग्य लाभुक नहीं मिलने से अब पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं.

प्रभारी बीडीओ ने जताई गड़बड़ी की आशंका

नारायणपुर के प्रभारी बीडीओ देवराज गुप्ता ने भी सत्यापन प्रक्रिया को लेकर संदेह जताया है. उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लाभुकों की जांच के बावजूद एक भी व्यक्ति का अयोग्य नहीं पाया जाना सामान्य बात नहीं है. बीडीओ ने कहा कि उन्हें लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही हैं कि कुछ पंचायत सचिव पैसे लेकर लाभुकों को योग्य घोषित कर रहे हैं और सत्यापन प्रक्रिया में अनियमितता बरती जा रही है. उन्होंने साफ कहा कि सरकार की यह महत्वपूर्ण योजना गरीब और जरूरतमंद महिलाओं के लिए चलाई जा रही है. ऐसे में किसी भी अपात्र व्यक्ति को योजना का लाभ नहीं मिलना चाहिए.

दोबारा होगी जांच

प्रभारी बीडीओ देवराज गुप्ता ने कहा कि अब वे स्वयं अपने स्तर से पूरे मामले की जांच करेंगे. जिन लाभुकों का अब तक सत्यापन हो चुका है, उनकी दोबारा जांच कराई जाएगी. उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जिन महिलाओं को योजना का लाभ दिया जा रहा है, वे वास्तव में पात्र हैं या नहीं. यदि जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित कर्मियों और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन की इस सख्ती के बाद अब सत्यापन प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं.

योजना की पारदर्शिता पर उठ रहे सवाल

मंईयां सम्मान योजना राज्य सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल है. इस योजना के जरिए महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है. ऐसे में यदि सत्यापन प्रक्रिया में गड़बड़ी होती है तो इसका सीधा असर सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर पड़ता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सही तरीके से जांच की जाए तो कई ऐसे मामले सामने आ सकते हैं, जहां अपात्र लोग भी योजना का लाभ ले रहे हैं. वहीं कुछ लोगों ने पंचायत स्तर पर जांच प्रक्रिया को लेकर निष्पक्षता की मांग की है.

इसे भी पढ़ें: रिजल्ट में रैंकिंग गिरने पर रेस हुए हजारीबाग के डीईओ, सरकारी टीचरों का होगा रेशनलाइजेशन

कार्रवाई के इंतजार में लोग

अब पूरे मामले में लोगों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है. यदि दोबारा जांच में अनियमितता साबित होती है तो कई कर्मियों पर कार्रवाई हो सकती है. वहीं प्रशासन का कहना है कि योजना में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और पात्र लाभुकों तक ही सरकारी सहायता पहुंचाने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा.

इसे भी पढ़ें: गंगा की सफाई में झारखंड ने फिर बनाया रिकॉर्ड, सात सालों से रखा प्रदूषण मुक्त

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >