जलवायु अनुकूलन को विकास और जनसुरक्षा से जोड़ना होगा : रबीन्द्रनाथ महतो

झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्रनाथ महतो ने केपटाउन में जलवायु अनुकूलन को सिर्फ पर्यावरण तक सीमित न रखकर विकास, जनसुरक्षा और आजीविका से जोड़ने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि भविष्य की जलवायु चुनौतियों के लिए संसदों को तैयार रहना होगा.

जामताड़ा से राजेश चौधरी की रिपोर्ट

फतेहपुर : 69वें राष्ट्रमंडल संसदीय संघ सम्मेलन के तहत गुरुवार को दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में आयोजित वर्कशॉप-C में झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्रनाथ महतो ने “Parliamentary Leadership in Climate Adaptation and Resilience” विषय पर व्याख्यान दिया. राष्ट्रमंडल संसदीय संघ का सम्मेलन 13 से 19 सितंबर 2026 तक विभिन्न सत्रों में आयोजित किया जा रहा है. अध्यक्ष रबीन्द्रनाथ महतो राष्ट्रमंडल संसदीय संघ की झारखंड शाखा के डेलीगेट के रूप में सम्मेलन में भाग ले रहे हैं.

जलवायु अनुकूलन को विकास और जनसुरक्षा से जोड़ा

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि जलवायु अनुकूलन को केवल पर्यावरण नीति तक सीमित नहीं रखा जा सकता. इसे विकास, जनसुरक्षा और आजीविका की रक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम मानना होगा. अनियमित वर्षा, तेजी से सूखते जलस्रोत, बढ़ती गर्मी तथा कृषि और आजीविका पर बढ़ता दबाव गंभीर चुनौतियां हैं.

क्लाइमेट जस्टिस और CBDR का किया उल्लेख

उन्होंने कहा कि भारत ने क्लाइमेट जस्टिस और CBDR (Common but Differentiated Responsibilities) के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए जलवायु अनुकूलन और सहनशीलता के लिए घरेलू स्तर पर महत्वपूर्ण निवेश किया है. वर्ष 2021-22 में यह देश की GDP का 5.6 प्रतिशत था.

टिकाऊ आधारभूत संरचना पर जोर

अध्यक्ष ने कहा कि भविष्य की जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सड़क, स्कूल, अस्पताल और जल प्रणालियों जैसी आधारभूत संरचनाओं को टिकाऊ बनाना होगा. किसानों, वैज्ञानिकों, आदिवासी समुदायों, महिलाओं, श्रमिकों, युवाओं और दिव्यांगजनों की जलवायु संबंधी निर्णयों में प्रभावी भागीदारी भी सुनिश्चित करनी होगी.

झारखंड की परिस्थितियों का किया उल्लेख

रबीन्द्रनाथ महतो ने कहा कि झारखंड में वन, जल, कृषि, खनिज, खनन और आदिवासी समुदायों की आजीविका आपस में गहराई से जुड़ी है. ऐसे में स्थानीय जरूरतों और परिस्थितियों के अनुरूप जलवायु अनुकूलन की रणनीति तैयार करना जरूरी है.

उन्होंने कहा कि संसद कानून, बजट, निगरानी और प्रतिनिधित्व के माध्यम से जलवायु अनुकूलन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हों संसद

उन्होंने कहा कि सहनशीलता विकास में बाधा नहीं, बल्कि बेहतर और टिकाऊ विकास की आधारशिला है. संसदों को केवल बहस के सदन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयारी के सदन के रूप में भी काम करना होगा.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Umesh Kumar

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >