आमलाचातर में पांच दिवसीय सोहराय पर्व का समापन

जामताड़ा. आमलाचातर गांव में प्रकृति, परंपरा और पशु सम्मान के प्रतीक पांच दिवसीय सोहराय पर्व हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ.

जामताड़ा. आमलाचातर गांव में प्रकृति, परंपरा और पशु सम्मान के प्रतीक पांच दिवसीय सोहराय पर्व हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ. यह पर्व झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है. संताल परगना में विशेष रूप से कुड़मी समाज की ओर से पर्व मनाया जाता है, जो कृषि और पशुपालन से जुड़ा हुआ है. सोहराय पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि धरती, पशु और मानव के मधुर संबंधों का प्रतीक है. यह पर्व बताता है कि किसान और उसके मवेशी, दोनों ही जीवन और आजीविका के अभिन्न अंग हैं. पर्व की शुरुआत बरदखूंटा से हुई. ग्राम प्रधान जर्मन महतो ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया. पांच दिनों तक गांव में ढोल, मांदर और नगाड़ों की थाप गूंजती रही. ग्रामीणों ने धिंगुवान, झूमर और ओहिरा जैसे पारंपरिक लोकनृत्यों और गीतों से अपनी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत किया. टोटेमिक कुड़मी विकास मोर्चा के केंद्रीय महासचिव अशोक कुमार महतो ने कहा सोहराय केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि यह कुड़मी जनजाति का जीवन दर्शन है. मौके पर जनकल्याण युवक समिति के अध्यक्ष जनार्दन महतो, सचिव मनोज सिंह, कोषाध्यक्ष अतिका चंद्र, सक्रिय सदस्य जियाराम महतो, दीपक महतो, दिनेश महतो, टिकन सिंह, सुखदेव सिंह, संजू देवी, उमा कुमारी, पंचानन महतो, उमापद महतो और जुगल महतो मौजूद थे.

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By JIYARAM MURMU

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