प्रतिनिधि, बिंदापाथर
अजय बराज परियोजना के तहत देवघर जिले के सिकटिया से जामताड़ा जिले के कुंडहित प्रखंड की अंतिम सीमा तक करीब 30-35 वर्ष पूर्व निर्मित नहर किसानों के लिए महज एक उम्मीद बनकर रह गई है. निर्माण के दशकों बाद भी नहर में नियमित रूप से सिंचाई का पानी नहीं छोड़े जाने से सारठ और नाला विधानसभा क्षेत्र के हजारों किसान खेती के लिए वर्षा पर निर्भर हैं. लगातार दो वर्षों से नहर के पूरी तरह सूखे रहने से किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है. वर्तमान खरीफ मौसम में धान रोपाई का समय तेजी से बीत रहा है, लेकिन खेतों में पानी नहीं होने के कारण किसान गंभीर संकट से जूझ रहे हैं. आषाढ़ माह लगभग समाप्त हो चुका है और क्षेत्र में सामान्य से काफी कम बारिश हुई है. ऐसे में किसान प्रतिदिन अपने खेतों का जायजा लेने पहुंचते हैं और पानी के अभाव में निराश होकर लौटने को विवश हैं. किसानों ने आरोप लगाया कि सरकार और संबंधित विभाग की उदासीनता के कारण अजय बराज नहर का लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है. उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो से किसानों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए अविलंब अजय बराज नहर में पानी छोड़ने की व्यवस्था सुनिश्चित कराने की मांग की है, ताकि समय रहते धान की रोपाई हो सके. किसानों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र नहर में पानी नहीं छोड़ा गया तो नाला विधानसभा क्षेत्र के किसान उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे. आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी सरकार एवं संबंधित विभाग की होगी. विरोध कार्यक्रम में भाजपा जिला उपाध्यक्ष दिलीप कुमार हेंब्रम, जिला मंत्री अबिता हांसदा, खैरा मंडल महामंत्री बाबूजन टुडू, जामताड़ा ग्रामीण मंडल अध्यक्ष उत्तम हेंब्रम, कपिल देव सोरेन, सुनील हेंब्रम सहित बड़ी संख्या में किसान शामिल थे.
