संवाददाता, जामताड़ा : जामताड़ा जिला चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करने के प्रस्ताव का विरोध किया है. उन्होंने कहा कि यह फैसला डिजिटल इंडिया और छोटे व्यापारियों के हितों के खिलाफ है. शुल्क लागू होने से व्यापारियों के मुनाफे पर सीधा असर पड़ेगा और अतिरिक्त जीएसटी का बोझ भी बढ़ेगा.
एमडीआर लागू होने से नकद लेनदेन बढ़ने की आशंका
संजय अग्रवाल ने कहा कि यूपीआई के निशुल्क और आसान होने के कारण देश में डिजिटल भुगतान को व्यापक बढ़ावा मिला है. एमडीआर लागू होने से छोटे और मध्यम व्यापारी दोबारा नकद लेनदेन की ओर लौट सकते हैं, जिससे कैशलेस अर्थव्यवस्था को झटका लगने की आशंका है. उन्होंने कहा कि शुल्क का असर अंततः वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर पड़ सकता है, जिसका बोझ उपभोक्ताओं को उठाना पड़ेगा.
15 अक्टूबर से प्रस्तावित शुल्क वापस लेने की मांग
चैंबर ने सरकार और एनपीसीआई से 15 अक्टूबर से प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत एमडीआर को तत्काल वापस लेने की मांग की है. संजय अग्रवाल ने चेतावनी दी कि फैसला वापस नहीं लिया गया तो व्यापारी संगठन देशव्यापी आंदोलन और डिजिटल भुगतान के बहिष्कार जैसे कदम उठाने पर विचार करेंगे.
