जामताड़ा : जामताड़ा बाल कल्याण समिति आधारभूत संरचनाओं की कमी का रोना रो रहा है. समिति को केवल कार्यालय उपलब्ध करा दिया गया है, लेकिन कार्यालय में कोई सुविधा नहीं हैं. पुराने कोर्ट परिसर में समिति का कार्यालय है. सुविधा के नाम पर चार कुरसी, एक टेबुल, कंप्यूटर और पंखा है. इन सभी सामान पर धूल जमी रहती है. इसके अलावा समिति के पास आवंटन का अभाव है. इस कारण समिति के सदस्य अपने जेब से खर्च कर रहे हैं. इतना ही नहीं बाल गृह भी नहीं है. इस कारण समिति द्वारा मुक्त कराये गये बच्चों को मजबूरन महिला थाना में रखा जाता है. इस पर न तो स्थानीय प्रशासन आैर न ही सरकार ध्यान दे रहा है.
नहीं मिलता बैठक भत्ता: जिला बाल कल्याण समिति को बैठक भत्ता भी नहीं मिल रहा है. इससे समिति को आर्थिक परेशानी हो रही है. समिति के लोग अपने पैसे खर्च कर काम कर रहे हैं.
जिला बाल कल्याण समिति के पास आवंटन का भी अभाव है. आवंटन नहीं रहने से कई परेशानी हो रही है. निजी खर्च कर आवश्यक कार्रवाई पूरी करनी पड़ रही है. जिला बाल कल्याण समिति द्वारा मुक्त कराये गये बच्चाें व बच्चियों को महिला थाना में रखना पड़ता है.
क्या है प्रावधान
जिला बाल कल्याण समिति के पास नियमानुसार एक किरानी एक चपरासी तथा एक कंप्यूटर ऑपरेटर होने का प्रावधान है. लेकिन यह आज तक उपलब्ध नहीं हो सका. कंप्यूटर बंद कमरे में धूल फांक रही है. कार्यालय में केवल मात्र चार कुरसी व एक टेबुल है.
नहीं है बाल सुधार गृह
महिला थाना में रखे जाते हैं मुक्त कराये गये बच्चे
समिति के पास किरानी, चपरासी व कंप्यूटर ऑपरेटर नहीं
कंप्यूटर बंद कमरे में फांक रहा धूल
क्या कहते हैं समिति के अध्यक्ष
जिला बाल कल्याण समिति को आधारभूत संरचना की कमी है. बाल गृह नहीं रहने से मुक्त कराये गये बच्चों तथा बच्चियों को महिला थाना में रखा जाता है.आवंटन नहीं रहने से अपने जेब से खर्च करना पड़ रहा है. अभी तक चार से पांच हजार रुपये खर्च हो चुकी है. समिति के पास न तो किरानी, चपरासी और न ही कंप्यूटर ऑपरेटर है.
प्रो काली कुमार घोष, अध्यक्ष जिला बाल कल्याण समिति
