बगैर अनुमति के विभाग ने खरीदी दवाइयां

जामताड़ा : ना अस्पताल प्रबंधन समिति की स्वीकृति मिली ना ही आलाधिकारियों से अनुमति ली गयी और सदर अस्पताल में लाखों की दवा खरीद ली गयी. इतना ही नहीं सीएस ने कुल खरीदारी के 50 प्रतिशत राशि का भुगतान भी कंपनी को कर दिया गया. जब उपायुक्त के संज्ञान में मामला गया तो उन्होंने कहा […]

जामताड़ा : ना अस्पताल प्रबंधन समिति की स्वीकृति मिली ना ही आलाधिकारियों से अनुमति ली गयी और सदर अस्पताल में लाखों की दवा खरीद ली गयी. इतना ही नहीं सीएस ने कुल खरीदारी के 50 प्रतिशत राशि का भुगतान भी कंपनी को कर दिया गया. जब उपायुक्त के संज्ञान में मामला गया तो उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच करायी जायेगी.
क्योंकि अस्पताल में दवा खरीदारी या अन्य कोई भी खरीददारी के लिए प्रबंधन समिति की बैठक में मामला रखा जाता है फिर उस पर सहमति के बाद ही उसे अमलीजामा दी जाती है. हालांकि यह पूरा मामला सीएस की देखरेख में हुआ है, पूछने पर उन्होंने इस बात को स्वीकार भी किया है कि उन्होंने ही दवा की खरीदारी की है और आधी राशि का भुगतान किया है.
क्या है मामला
स्वास्थ्य विभाग द्वारा मासूक इंटर प्राइजेज से डायरीया के लिए ओआरएस की दवा खरीदारी की गयी थी. मामला इसी वर्ष जुलाई माह का है. 2.58 पैसे प्रति पैकेट की दर से ओआरएस कंपनी से डील की गयी.
कंपनी ने विभाग को कुल 84 हजार पैकेट आपूर्ति की. जिसमें से 18200 पीस ओआरएस दवा आवंटन के अभाव में कंपनी को वापस कर दिया गया. विभाग ने 65, 800 पैकेट ओआरएस ले ली. जिसकी कीमत कुल एक लाख 68 हजार 780 रुपया होता है. जब भुगतान की बात आयी तो सीएस ने विभाग के खाते से कुल राशि का आधा हिस्सा कंपनी काे भुगतान भी कर दिया.
लेनी होती है अनुमति
सदर अस्पताल में दवा खरीदारी के लिए अस्पताल प्रबंध समिति के अध्यक्ष की अनुमति जरूरी होती है. इस समित के अध्यक्ष जिले के उपायुक्त होते हैं. इस खरीदरी की स्वीकृति के लिए फाइल अभी उपायुक्त कार्यालय में रखी हुई है. लेकिन स्वीकृति मिली भी नहीं और खरीदारी कर ली गयी.

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