जमशेदपुर: सिविल जज सीनियर डिविजन-1 की अदालत में जयसिंह भूमिज बनाम शैलेंद्र महतो मामले (केस संख्या 103/2025) में मध्यस्थता की प्रक्रिया हुई. इस दौरान दोनों पक्षों की ओर से अधिवक्ता और संबंधित लोग उपस्थित रहे.
वादी पक्ष से अधिवक्ता उमेश दुबे, जय सिंह भूमिज और मेघलाल सरदार मौजूद रहे. वहीं, प्रतिवादी पक्ष से पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो, अधिवक्ता रोहित कुमार, प्रोफेसर गुरुपद महतो, तपन कुमार महतो और निवारण महतो उपस्थित रहे.
वादी पक्ष ने रघुनाथ महतो को नेता मानने पर जतायी आपत्ति
अदालत में वादी पक्ष की ओर से प्रार्थना की गयी कि यह घोषित किया जाए कि रघुनाथ महतो चुआड़ आंदोलन के नेता नहीं थे. साथ ही शैलेंद्र महतो द्वारा लिखित पुस्तक 'झारखंड में विद्रोह का इतिहास (1767-1947)' में आवश्यक संशोधन का निर्देश देने की मांग की गयी.
शैलेंद्र महतो ने 10 पुस्तकों के संदर्भ रखे
इसके जवाब में प्रतिवादी शैलेंद्र महतो ने अदालत में अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि रघुनाथ महतो चुआड़ विद्रोह के अग्रदूत और सर्वमान्य नेता थे. उनके अनुसार, वर्ष 1769 में रघुनाथ महतो ने जल, जंगल, जमीन की रक्षा और अस्मिता की खातिर अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका था. इसे अंग्रेजों और उनके पिट्ठू जमींदारों ने 'चुआड़ विद्रोह' नाम दिया था.
अपने दावे के समर्थन में शैलेंद्र महतो ने अदालत में विभिन्न इतिहासकारों और शोधकर्ताओं की 10 प्रामाणिक पुस्तकों के संदर्भ प्रस्तुत किये. इनमें 'एक नोजोरे पुरुलिया', 'झारखंड', 'पीपुल ऑफ इंडिया', 'स्वतंत्रता संग्राम के वीर सपूतों की गौरव गाथा', 'झारखंड के वीर शहीद', 'झारखंड के 50 क्रांतिकारी', 'भारत के जनजातीय क्रांतिवीर', 'बांग्लाय इंगरेज राजत्वेर सूचना ओ जनजाति बिद्रोह', 'झारखंड के क्रांतिकारी' और शोध पत्रिका 'झारखंडोदय' शामिल हैं. मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को निर्धारित की गयी है.
