जमशेदपुर: वीर शहीद साबुआ हांसदा का नाम आते ही जंगल बचाओ आंदोलन का वह त्याग और अदम्य साहस आंखों के सामने तैरने लगता है, जिसने हमारी माटी को मान और पहचान दी. वीर शहीद की शहादत केवल इतिहास का पन्ना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए अन्याय के खिलाफ खड़े होने और अपनी जड़ों की रक्षा करने का जीवंत संदेश है. इसी पावन विरासत को आगे बढ़ाते हुए 12 सितंबर को केरुकोचा स्थित बामनडीह गांव में शहादत दिवस पर केवल अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि ही अर्पित नहीं की जाएगी, बल्कि मानवता की रक्षा का एक नया अध्याय भी लिखा जाएगा. इस वर्ष बामनडीह गांव के युवाओं ने शहीद साबुआ हांसदा की सोच को एक नया आयाम दिया है.
पहली बार शहीद बेदी के समीप स्थित सामुदायिक भवन में एक विशाल रक्तदान शिविर आयोजित किया जा रहा है. गांव के युवाओं का मानना है कि जैसे शहीद साबुआ हांसदा ने अपनी माटी के लिए रक्त बहाया था, वैसे ही आज के युवाओं को दूसरों का जीवन बचाने के लिए अपना रक्त देना चाहिए. यह पहल न केवल रक्तदान के प्रति फैली भ्रांतियों को तोड़ेगी, बल्कि दर्जनों जिंदगियों को नया जीवन भी प्रदान करेगी.
गांव-गांव गूंजा 'रक्तदान-महादान' का संदेश
इस ऐतिहासिक संकल्प को मुकाम तक पहुँचाने के लिए युवा समाजसेवी राजेश सोरेन के नेतृत्व में तैयारियां जोरों पर हैं. बामनडीह समेत हरिनिया, केरुकोचा, बांसदा, मुराल, नयाग्राम, भदुआकोचा और दुधियाशोल जैसे आस-पास के दर्जनों गांवों में जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. इस मुहिम में जमशेदपुर के जाने-माने 'ट्राइबल ब्लड मैन' राजेश मार्डी स्वयं उपस्थित रहकर रक्तदाताओं का हौसला बढ़ाएंगे. राम हांसदा, माताल मांडी, होपना सोरेन और सुभाष मुर्मू सहित गांव-गांव के युवा कंधे से कंधा मिलाकर घर-घर अलख जगा रहे हैं. 12 सितंबर का यह दिन साबित करेगा कि जब शहादत का जज्बा और सेवा की भावना एक साथ मिलते हैं, तो बदलाव की एक नई क्रांति का जन्म होता है.
