टाटा लीज समझौता को जल्द करने के लिए कोशिशें की जा रही हैं. इससे औद्योगिक विकास के साथ-साथ शहर के सर्वांगीण विकास का काम तेज होगा. इसे लेकर सरकार के स्तर पर पहल की गयी है. टाटा स्टील के वीपी (सीएस) डीबी सुंदर रामम ने उक्त बातें कही. प्रभात खबर से बातचीत में सुंदर रामम ने कहा कि टाटा लीज समझौता को लेकर कोई दिक्कत नहीं है. कोल्हान के आयुक्त ने पहली बैठक में टाटा लीज से संबंधित कई सारी जानकारी हासिल की है. सकारात्मक बातचीत हुई है. राज्य सरकार और अधिकारी सकारात्मक काम कर रहे हैं. सरकार के पास सारे दस्तावेज दे दिये गये हैं. जल्द ही फैसला होगा, ऐसी उम्मीद है.
2005 में हुआ था लीज समझौता
कोल्हान आयुक्त के पद पर रवि रंजन विक्रम की पदस्थापना के बाद लीज नवीकरण की प्रक्रिया फिर से शुरू हो गयी है. झारखंड सरकार और टाटा स्टील के बीच पिछला समझौता वर्ष 2005 में 30 वर्षों के लिए हुआ था, जिसकी अवधि 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो चुकी है. तकनीकी रूप से फिलहाल जमशेदपुर की पूरी 10,852.27 एकड़ जमीन झारखंड सरकार के अधीन आ चुकी है. हालांकि, नया समझौता होने तक टाटा स्टील ”केयरटेकर” के रूप में नागरिक सुविधाओं और रखरखाव का कार्य जारी रखेगी.
पांच शेड्यूल में विभाजित है सबलीज की जमीन
टाटा स्टील के पास सबलीज के रूप में जो जमीन है, वह पांच अलग-अलग शेड्यूल (अनुसूचियों) में विभाजित है. शिड्यूल ए (प्लांट) में उत्पादन प्रक्रिया के लिए 1065.98 एकड़ जमीन है. शिड्यूल बी कंपनी की आवासीय कॉलोनी के लिए 1641.44 एकड़, शिड्यूल सी में खेल के मैदान, पार्क और सामुदायिक केंद्रों के लिए 2339.20 एकड़, शिड्यूल डी के व्यवसायिक व सबलीज की जमीन का 4015.96 एकड़ और शिड्यूल पांच में 1789.78 एकड़ खाली जमीन है.
