झारखंड में पहली बार स्काई डाइविंग, बहुत कम लोग जानते हैं धोनी भी कर चुके हैं एयरक्राफ्ट से जंप

‌जिंदगी ना मिलेगी दोबारा में दोस्तों को हवा में उड़ता देख भारत के कई युवाओं ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जाकर स्काई–डाइविंग का अनुभव किया है. पर क्या हो अगर आपका सपना आपके झारखंड में ही पूरा हो जाए.

झारखंड सरकार के सहयोग से जमशेदपुर में पहली बार स्काई–डाइविंग होने जा रही है. इसे स्काई–हाई संस्‍था कर रही है. प्रभात खबर के लिए रिंकू लोहिया ने स्काई–हाई के प्रमुख दि‌ग्विजय सिंह से खास बातचीत की. पढ़िए खास अंश–

सवाल- स्काई–डाइविंग होता क्या है और इसे किया कैसे जाता है?

जवाब- कई लोग स्काई–डाइविंग को और पैराग्लाइडिंग को एक ही चीज समझते हैं. पैराग्लाइडिंग में आप भाग करके टेक ऑफ करते हैं. स्काई–डाइविंग में आप या तो हेलीकॉप्टर से या एक फिक्स्ड विंग एयरक्राफ्ट से ऊपर से छलांग लगाते हैं. वहां आप टेक ऑफ नहीं करते, जंप करते हैं.

सवाल. स्काई–डाइविंग में कितनी ऊंचाई से जंप किया जाता है?  

जवाब. आमतौर पर 10,000 फीट या उससे ऊपर की ऊंचाई से छलांग लगते हैं. आपके पास काफी टाइम होता है हवा से नीचे आने के लिए. पैराशूट खोलने के लिए. 

सवाल. एक एयरक्राफ्ट में कितने लोग एक साथ जाते हैं जंप करने?

जवाब. मैंने पहली बार यूएस में स्काई–डाइविंग की. जिस एयरक्राफ्ट से मैंने स्टार्ट किया था उसमें चार लोग बैठ सकते थे. अमूमन तीन से चार ही लोग होते हैं. वहीं पर ए लाइसेंस लिया. इस लाइसेंस का मतलब होता है कि 25 जंप. भारत वापस आया मध्य प्रदेश के सागर तब जंप होती थी. 

सवाल. आपके घर में जंप के लिए अनुमति थी?

जवाब. मेरे घरवाले कहते थे कि यह क्या पागलपन है. एक बार किया- दो बार किया. बार–बार क्‍यों? तब अपने पेरेंट्स को 2011 में अमेरिका लेकर गया और अपने माता और पिता दोनों को जंप कराया. तब पिता की उम्र 73 साल थी मां 63 की थीं. दोनों ने नीचे आकर कहा- यार एक बार और. 

सवाल. अभी तक आपने कितने जंप कर लिए हैं? 

जवाब. अभी तक मैंने 275 से ज्यादा जंप कर लिया है. 

सवाल. कोई आम आदमी जंप करना चाहे तो उसे क्या करना होगा?

जवाब. सामान्य लोग फ्री फॉल यानी अकेले जंप नहीं करते. आपके साथ एक इंस्ट्रक्टर होता है. यह कुछ इस तरीके से होता है जैसे कि आप एक टैक्सी ड्राइव के लिए जाते हैं और आप एक टैक्सी को हायर करते हैं वह आपके लिए टैक्सी लेकर आएगा वह टैक्सी चलाएगा और आप पीछे बैठे रहेंगे तो स्काई-डाइविंग में भी ट्रैंडम जंप होता है. ट्रैंडम आपके लिए पैराशूट खोलेता है. आप उसे पायलट भी कह सकते हैं.

सवाल. आपकी कंपनी कैसे शुरू हुई? आपकी कंपनी के जरिए हर महीने कितने लोग जंप करते हैं? 

जवाब. इसकी शुरुआत 2017 में की थी 2018 से हमारा परमानेंट बेस मिल गया और उसके बाद हम हरियाणा में है. स्काई-डाइविंग में 400 से 500 लोग हर महीने जंप करते हैं. यह सिर्फ सप्ताह में तीन दिन खुलता है शुक्रवार शनिवार और रविवार. हमने अब हरियाणा से आगे राज्यों में भी जाने लगे हैं.

सवाल. अब आप झारखंड में भी आ रहे हैं?

जवाब.  झारखंड पांचवां राज्य है. झारखंड पर्यटन विभाग की तरफ से इस दिशा में कोशिश की गई है. उनके विजन की वजह से हम इस दिशा में आगे बढ़ पा रहे हैं. झारखंड में यह 16 फरवरी से 23 फरवरी तक चलेगा.

सवाल. किसी एक शख्स को स्काई-डाइविंग के लिए कितना खर्च करना होता है.

जवाब. स्काई-डाइविंग के लिए 30000 और जीएसटी का भुगतान करना पड़ता है लेकिन अगर आप दुबई में जाते हैं तो दुबई में आपको ₹50000 से भी ज्यादा पैसे चुकाने पड़ते हैं तो उसे लिहाज से दुबई से यह सस्ता है. 

सवाल. किसी को आपके स्लॉट बुक करने हों तो क्या करना होगा?

जवाब. हमारे पास बुकिंग ऑनलाइन ही होती हैं. स्काई हाई डॉट कॉम और इसके इंस्टाग्राम पेज से कोई भी बुक कर सकता है.

सवाल. इंडिया में सेफ्टी के लिए लोग चिंतिंत रहते हैं. आप क्या कहेंगे? 

जवाब. हमारी संस्‍था यूनाइटेड स्टेट्स पैराशूट संगठन से एफिलेटेड है. हम स्टैंडर्ड प्रोसीजर फॉलो करते हैं. दरअसल हम दोगुना चौकन्ना रहते हैं क्योंकि एक भी गलती होने पर यहां काम रुकने का डर होता है. 

सवाल. झारखंड और भारत में स्काई–डाइविंग के लिए कोई मशहूर है, जिसे लोग जानते हों?

जवाब. बहुत कम लोगों को पता है कि फरहान अख्तर एक फ्री फॉल फॉलोअर हैं और उन्होंने 150 से 200 तक के जंप किए हुए हैं. हमने उन्हें बुलाया भी और उन्होंने हमें कहा भी है कि जब वह फ्री होंगे तो वह हमारे पास जरूर आएंगे. एमएस धोनी को भी हमने बुलाया है जो उनके जो ट्रेनर है वह आर्मी में पैरा ग्लाइडिंग से जुड़े हुए हैं तो हमने उन्हें भी आमंत्रित किया हुआ है. धोनी भी कई जंप कर चुके हैं.

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लेखक के बारे में

By Janardan pandey

जनार्दन पांडेय प्रभात खबर डिजिटल में रेजिडेंट एडिटर हैं. पिछले 14 साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं और न्यूज रूम, डिजिटल रणनीति और ऑडियंस ग्रोथ पर काम कर रहे हैं. इससे पहले वे अमर उजाला, न्यूज18 और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुके हैं.

डिजिटल पत्रकारिता में नए प्रयोग, AI, सॉल्यूशन जर्नलिज्म और मीडिया इनोवेशन उनके पसंदीदा विषय हैं. साल 2024 में उन्हें एक्सचेंज4मीडिया के 40 अंडर 40 सम्मान से सम्मानित किया गया. वे इंडो जर्मन जर्नलिज्म कनेक्ट फेलो भी रह चुके हैं.

जनार्दन दो पुस्तकों के लेखक हैं. बिहार विधानसभा चुनाव पर लिखी उनकी पुस्तक 'बिहार जनादेश 2025: NDA की प्रचंड जीत की पूरी कहानी' और "Rewiring Trust in Journalism" हैंडबुक को व्यापक सराहना मिली. वे समय समय पर डिजिटल मीडिया, पत्रकारिता और बदलती तकनीक पर लिखते हैं और पत्रकारों को प्रशिक्षण भी देते हैं। 📩 संपर्क : janardan.pandey@prabhatkhabar.in

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