jamshedpur. आदिवासी-मूलवासी समाज ने गुरुवार को पूर्वजों की जमाने से चली आ रही रोहिन पर्व गुरुवार को पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ मनाया गया. किसानों ने खेतों में धान बीज बुआई कर नये कृषि सत्र का शुभारंभ किया. गांव के खेत-खलिहानों में पारंपरिक पूजा-अर्चना का माहौल देखने को मिला. सामाजिक कार्यकर्ता व किसान सुधांशु बानुआर ने बताया कि रोहिन पर्व केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि उनकी कृषि, सभ्यता, प्रकृति संरक्षण और पुरखों की परंपरा से जुड़ी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर है. किसान अपने खेतों में तीन मुट्ठी धान बीज डालकर पूर्वजों और प्रकृति देवता को स्मरण करते हैं. इसके बाद शाम के समय खेतों से रोहिन माटी (मिट्टी) घर लाने की एक विशेष परंपरा निभायी जाती है. किसान विश्वनाथ महतो ने बताया कि रोहिन पर्व के दिन रोहिन फल को खाने का विशेष परंपरा है. .
पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ रोहिन पर्व मनाया गया
आदिवासी-मूलवासी समाज ने गुरुवार को खेतों में बीज की बुआइ व पूजा-अर्चना कर रोहिनी पवर्व मनाया
