Jamshedpur News : जेएनएसी के सेवानिवृत्त कर्मियों के बकाये मामले में राजभवन गंभीर, तत्काल समाधान का निर्देश
जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) के सेवानिवृत्त और कार्यरत कर्मचारियों के वित्तीय बकाये के भुगतान मामले में राज्यपाल के अपर सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने जेएनएसी के विशेष पदाधिकारी को तत्काल समाधान निकालने का निर्देश दिया है.
चार साल से दबी हैं 45 कार्यरत व सेवानिवृत्त कर्मियों की फाइलें
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जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) के सेवानिवृत्त और कार्यरत कर्मचारियों के वित्तीय बकाये के भुगतान मामले में राज्यपाल के अपर सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने जेएनएसी के विशेष पदाधिकारी को तत्काल समाधान निकालने का निर्देश दिया है. राजभवन के हस्तक्षेप के बाद पिछले चार साल से दफ्तर के चक्कर काट रहे पीड़ित कर्मचारियों में न्याय की उम्मीद जगी है. पूर्व कर्मियों का कहना है कि उन्होंने सेवानिवृत्ति से छह माह पूर्व (वर्ष 2021 में ही) तत्कालीन विशेष पदाधिकारी को पत्र लिखकर फरवरी 2022 में होने वाली सेवानिवृत्ति से पहले सारे बकाये के निष्पादन का आग्रह किया था. बावजूद पिछले चार सालों में कम से कम 10 बार लिखित स्मरण पत्र दिया गया, लेकिन जेएनएसी की ओर से कोई पहल नहीं की गयी. कर्मियों ने चेतावनी दी है कि यदि राजभवन के आदेश के बाद भी स्थापना विभाग ने तुरंत पहल नहीं की, तो वे उग्र आंदोलन का रुख अपनाने को बाध्य होंगे.
पिछले 3 महीने से पेंशन भी बंद
जेएनएसी के पूर्व स्वच्छता निरीक्षक धनंजय कुमार पांडेय सहित अन्य प्रभावित कर्मियों ने बकाये भुगतान की मांग को लेकर लिखित शिकायत राज्यपाल, मुख्यमंत्री, झारखंड के वित्त सचिव, जिले के डीसी और जेएनएसी के उप नगर आयुक्त से की थी. शिकायत में आरोप लगाया था कि लगभग 45 कार्यरत और सेवानिवृत्त कर्मचारी पिछले चार वर्षों से विभागीय उदासीनता के कारण भारी वित्तीय संकट और मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं. पिछले तीन महीनों से सेवानिवृत्त कर्मियों की पेंशन राशि का भी भुगतान नहीं किया गया है.
एरियर और एमएसीपी का लाभ सालों से लंबित
कर्मचारियों का आरोप है कि एरियर सहित अन्य लाभ पिछले चार सालों से विभागीय फाइलों में दब गया है. एमएसीपी (वित्तीय उन्नयन) नियमानुसार 30 वर्ष की सेवा पूरी करने पर मिलने वाला लाभ साल 2018 से ही बिना किसी ठोस कारण के रोक कर रखा गया है. पंचम वेतनमान (15 नवंबर 2000 से 31 दिसंबर 2005), छठा वेतनमान (1 जनवरी 2006 से 31 मार्च 2010) और सातवां वेतनमान (1 जनवरी 2016 से 1 मई 2018) तक की अवधि के अंतर राशि का एरियर भी अब तक बकाया है. सामूहिक बीमा योजना (जीआइसी) सेवानिवृत्ति से पूर्व की राशि का मूल्यांकन और भुगतान भी लंबित है.
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