जमशेदपुर : जमशेदपुर के टेल्को स्थित खड़ांगाझर झंडा चौक शनिवार को उस समय भावुक हो उठा, जब झारखंड के पूर्व मंत्री और वरिष्ठ झामुमो नेता स्वर्गीय रामदास सोरेन की आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया गया. प्रतिमा के सामने लोगों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी. उनके संघर्ष, जनसेवा तथा राजनीतिक योगदान को याद किया. कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों की मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि 'रामदास दा' आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं.
खड़ांगाझर झंडा चौक पर हुआ प्रतिमा का अनावरण
प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम में बड़ी संख्या में राजनीतिक कार्यकर्ता, सामाजिक संगठन के प्रतिनिधि और स्थानीय लोग शामिल हुए. कार्यक्रम के दौरान पूरे क्षेत्र में उत्साह और भावुकता का माहौल देखने को मिला. लोगों ने स्वर्गीय रामदास सोरेन के जीवन और समाज के प्रति उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए.
मंत्री दीपक बिरुवा और पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा भी रहे मौजूद
कार्यक्रम में मंत्री दीपक बिरुवा, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और घाटशिला विधायक सोमेश चंद्र सोरेन समेत कई प्रमुख नेताओं की मौजूदगी ने आयोजन को विशेष बना दिया. साथ ही हिदायतुल्लाह खान, शेख बदरुद्दीन, सुनील महतो, झामुमो जिला अध्यक्ष विक्टर सोरेन और प्रीतम हेंब्रम समेत कई नेता कार्यक्रम में शामिल हुए. मौके पर वक्ताओं ने कहा - स्वर्गीय रामदास सोरेन ने अपने राजनीतिक जीवन में आम लोगों, ग्रामीणों और वंचित वर्गों की आवाज को मजबूती से उठाया. उनका संघर्ष और जनसेवा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा.
सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से भी पहुंचे सैकड़ों लोग
कार्यक्रम में घाटशिला और जमशेदपुर के ग्रामीण इलाकों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे. खड़ांगाझर झंडा चौक पर लोगों की भीड़ पूरे दिन बनी रही. लोगों का कहना था कि सार्वजनिक स्थल पर स्थापित यह प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को उनके संघर्ष, विचारों और समाज के प्रति उनके समर्पण की याद दिलाती रहेगी. प्रतिमा अनावरण के बाद लोगों ने उनके बताए रास्ते पर चलने और जनसेवा की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया. कार्यक्रम में स्थानीय लोगों और समर्थकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली.
कौन थे रामदास सोरेन, क्यों आज भी आते हैं याद
झारखंड के पूर्व शिक्षा मंत्री और वरिष्ठ झामुमो नेता स्वर्गीय रामदास सोरेन को लोग आज भी उनके संघर्ष, सादगी और जनसेवा के लिए याद करते हैं. उन्होंने झारखंड आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और जल, जंगल व जमीन से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाया. ग्राम प्रधान से शिक्षा मंत्री तक का उनका सफर युवाओं के लिए प्रेरणादायक है. आदिवासी समाज, शिक्षा और राज्य के विकास के लिए उनके योगदान के कारण आज भी लोग उन्हें 'रामदास दा' के नाम से सम्मान के साथ याद करते हैं.
