जमशेदपुर: झारखंड में बंदियों के पुनर्वास और सुधार की दिशा में पहली बार एक अनोखी पहल करने की तैयारी की जा रही है. जमशेदपुर स्थित घाघीडीह केंद्रीय कारा में ओपन बैरक जेल स्थापित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है. इसको लेकर गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने जेल प्रशासन को एक रिपोर्ट बना कर उसे विभाग को सौंपने का आदेश दिया था. मिले दिशा निर्देश के बाद घाघीडीह जेल प्रशासन ने संबंधित विभाग को ओपन बैरक को लेकर रिपोर्ट भेज दिया है.
शाम को जेल में वापस आना है जरूरी
जिसमें बंदियों का पूरा विवरण भी दिया गया है. जेल प्रशासन की अनुशंसा पर गृह विभाग के सचिव की अध्यक्षता में एक बैठक का आयोजन किया जायेगा. उसके बाद फाइनल सलेक्शन चयन समिति करेगी. ओपन जेल या ओपन बैरक में पारंपरिक जेल की तरह ऊंची दीवारें, सलाखें या भारी सुरक्षा पहरा नहीं होता. इसमें रहने वाले बंदी न्यूनतम निगरानी में रहते हैं. ओपन बैरक के बंदी सुबह में मजदूरी या अन्य काम के लिए बाहर जा सकते हैं, लेकिन शाम को जेल में वापस आना जरूरी होता है. अगर बंदी इस नियम का उलंघन्न करते है तो बंदियों पर कार्रवाई होती है.
दो वार्ड को बनाया जायेगा ओपन बैरक
जिसमें घाघीडीह जेल के दो वार्ड को ओपन वार्ड बनाने का निर्णय लिया गया है. मिली जानकारी के अनुसार ओपन बैरक में लगभग 50 बंदियों का चयन किया जाना है. जो दिन के वक्त में कार्यों के लिए जेल से बाहर जायेंगे और फिर काम पूरा करने के बाद शाम को वापस जेल आयेंगे. काम के लिए बाहर जाने वाले बंदियों को पूरी जानकारी देनी होगी कि वह किस कंपनी या संस्थान में नौकरी करने के लिए जा रहे है. वहां का पूरा विवरण जेल प्रशासन को उपलब्ध कराना होगा.
अच्छे आचरण वाले बंदियों का होगा चयन
जेल प्रशासन ने बताया कि ओपन बैरक में रहने वाले बंदियों का चयन किया जायेगा. इसमें वैसे बंदियों का चयन किया जायेगा जिनका आचरण काफी अच्छा हो. जेल प्रशासन ने बताया कि ओपन बैरक के लिए उन बंदियों का ही चयन किया जायेगा जो सजायाफ्ता हो. साथ ही वह बंदी अपनी सजा का अधिक समय जेल में पूरा कर लिया हो. सजा काटने के दौरान बंदी का व्यवहार जेल में अच्दा रहा हो. साथ ही वह किसी भी मारपीट, विवाद या अनुशासनहीनता में शामिल न रहा हो. ओपन बैरक के लिए प्राथमिकता सिर्फ उन कैदियों को दी जाएगी जिनमें सुधार की संभावना अधिक हो और जिनके फरार होने की आशंका न हो. गंभीर अपराधों में शामिल बंदियों को इस व्यवस्था से पूरी तरह दूर रखा जायेगा.
ओपन बैरक का मुख्य उद्देश्य :
- ओपन बैरक में रहने वाले बंदियों को सामाजिक पुनर्वास का मौका मिलेगा. सजा पूरी होने के बाद बंदी जब जेल से बाहर आएं, तो उन्हें समाज में कठिनाई न हो और वे एक सामान्य नागरिक की तरह जीवन यापन कर सकेंगे.
- दिन में काम या रोजगार करने की छूट मिलने से बंदी अपने परिवार का आर्थिक सहयोग कर पायेंगे. साथ ही उन्हें काम का अनुभव मिलेगा.
- जेल से निकल कर काम करने से बंदियों का मानसिक तनाव कम होता है और उनमें सकारात्मक सोच का विकास होगा.
- न्यूनतम निगरानी और विश्वास के माहौल में बंदियों में जिम्मेदारी का अहसास जागृत होगा. जिससे उनके दोबारा अपराध की राह पर जाने की संभावना न के बराबर होगी.
कोट - घाघीडीह जेल में ओपन बैरक बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है. विभाग के निर्देश पर ओपन बैरक का रिपोर्ट बंदियों के नाम, उसके केस स्टडी के साथ बना कर विभाग को भेज दिया गया है. फाइनल सलेक्शन विभाग के वरीय अधिकारियों की समिति द्वारा की जायेगी. अजय कुमार प्रजापति,अधीक्षक, घाघीडीह सेंट्रल जेल
