Jamshedpur News : दलमा में हाथियों की संख्या 104 से घटकर 72 पर पहुंची

Jamshedpur News : दलमा अभ्यारण्य में लगातार हाथियों की संख्या घटती जा रही है. 2023 की गणना में हाथियों की संख्या 104 थी, जो इस बार की गणना के बाद करीब 72 हो गयी है.

दलमा में नहीं लौट रहे हाथी, कॉरिडोर टूटने और हैबिटाट सिकुड़ने से पलायन

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दलमा अभ्यारण्य में लगातार हाथियों की संख्या घटती जा रही है. 2023 की गणना में हाथियों की संख्या 104 थी, जो इस बार की गणना के बाद करीब 72 हो गयी है. वाटरहोल मॉनिटरिंग के आधार पर तैयार रिपोर्ट वन विभाग को सौंप दी गयी है. विशेषज्ञ इसे गंभीर चेतावनी मान रहे हैं, क्योंकि दलमा पूर्वी भारत का प्रमुख एलिफेंट होम रेंज रहा है.

वहीं, इससे पहले वाइल्ड लाइफ इंस्टीच्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूडब्ल्यूआइ) ने डीएनए के आधार पर हाथियों की गणना की थी. इसमें पूरे झारखंड में हाथियों की संख्या 679 से घटकर 217 पायी गयी. करीब 68 फीसदी की कमी दर्ज की गयी है. 2017 से 2025 के बीच में यह कमी दर्ज की गयी है, जो चौंकाने वाले तथ्य हैं. इसके तहत दलमा में भी हाथियों की गणना की गयी थी. इसमें भी काफी कमी दर्ज की गयी है. मिली जानकारी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के बीच एलिफेंड कॉरिडोर होने के कारण हाथी वहां से दलमा आते-जाते रहते हैं. लेकिन उनका भटकाव रिहायशी इलाकों की ओर नहीं होता था. लेकिन हाल के दिनों में यह देखा गया है कि दलमा की ओर हाथियों की वापसी नहीं हो पा रही है. इसकी कई वजह है. बताया जाता है कि बंगाल ने करीब 10 साल पहले ट्रेंच खोदकर हाथियों की इंट्री रोक दी थी, जिसके बाद से हाथियों का रुट खराब हो गया. सुवर्णरेखा परियोजना के कारण भी उनका कॉरिडोर बर्बाद हो गया. इसके अलावा हाथियों के लिए हैबिटाट की कमी हो गयी, जिससे मुश्किलें काफी ज्यादा बढ़ी है. इसको लेकर वन विभाग की ओर से दावे जरूर किये गये हैं, लेकिन यह कागजी ही साबित हुई है. दलमा में हुए निर्माण कार्य और मानव की बढ़ती भीड़ भी इसकी बड़ी वजह है. वन विभाग के मुताबिक, हर साल दलमा में करीब 60 हजार पर्यटक आते हैं. पर्यटकों के लिए कई सारे निर्माण जंगल में हो गये हैं. कंक्रीट का जाल धीरे-धीरे जंगल में तैयार हो रहे हैं. वहां के रास्तों में लगने वाले फल और पौधे भी हाथियों के हैबिटाट के मुताबिक नहीं होना बड़ा कारण है. इसको लेकर नये सिरे से प्रयास करने की जरूरत है.

क्या कहते हैं जानकार

दलमा को लेकर अलग से प्लान वृहद तौर पर बनाया गया है. इस पर वन विभाग ने काम भी किया है. यह देखने वाली बात होगी कि कैसे हाथी कम हो रहे हैं. उनके हैबिटाट, कॉरिडोर को नये सिरे से समीक्षा करने की जरूरत होगी और यह इंटर स्टेट समेकित प्रयास करना होगा, ताकि हाथियों की संख्या को बढ़ाया जा सके.

सत्यजीत सिंह, पूर्व पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ, झारखंडB

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Author: RAJESH SINGH

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