पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) जिले में मलेरिया का प्रकोप बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. स्वास्थ्य विभाग से जारी आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को जिले भर में कुल 11,090 संदिग्ध मरीजों की जांच की गयी, जिसमें 101 नये मलेरिया पॉजिटिव मरीज मिले हैं. इनमें से 67 मरीज सबसे घातक माने जाने वाले पीएफ (फाल्सीपेरम) मलेरिया से ग्रसित हैं, जबकि 31 मरीजों में पीवी (विवैक्स) और अन्य में मिक्स संक्रमण की पुष्टि हुई है. गुरुवार को प्रखंडवार मिले मरीजों में पटमदा प्रखंड 21 मरीजों के साथ शीर्ष पर रहा. इसके अलावा पोटका में 19, डुमरिया में 18, घाटशिला में 16, मुसाबनी में 16, धालभूमगढ़ में 5, बहरागोड़ा में 1 और सदर अस्पताल खासमहल में जांच के दौरान 5 मरीजों की पुष्टि हुई है. हालांकि, राहत की बात यह रही कि शहरी क्षेत्रों (जुगसलाई, चाकुलिया, मानगो और बिरसानगर) में की गई 2,596 जांचों में एक भी पॉजिटिव केस नहीं मिला.
अस्पतालों में बढ़े मरीज, दो की हालत बेहद गंभीरसंक्रमण बढ़ने के साथ अस्पतालों के बेड भरने लगे हैं. वर्तमान में खासमहल स्थित सदर अस्पताल में 40 और एमजीएम अस्पताल में 11 मरीज भर्ती हैं. एमजीएम की आइसीयू में 6 गंभीर मरीजों का इलाज चल रहा है, जिनमें से दो की स्थिति बेहद नाजुक बतायी जा रही है. स्थिति से निपटने के लिए पोटका ब्लॉक के 8 गांवों में फॉगिंग करायी गयी है. जिले के 17 संवेदनशील गांवों में आइआरएस (इंसाइड रेसिड्यूअल स्प्रे) का छिड़काव किया गया है.
पिछले 11 दिनों का रिपोर्ट कार्ड (29 जून से 9 जुलाई)श्रेणी : कुल आंकड़े
कुल जांच (टेस्ट) : 63,570 (59,578 आरडीटी 3,992 स्लाइड) कुल पॉजिटिव मरीज : 1,603
औसत संक्रमण दर : 2.69%पीएफ (घातक रूप) : 1,268 मामले
पीवी पॉजिटिव : 295 मामलेमिक्स संक्रमण : 40 मामले
उच्चतम स्तर : 1 जुलाई को रिकॉर्ड 320 मामले मिले
लखाइडीह आवासीय विद्यालय में 13 व मवि में 11 बच्चे संक्रमित
गुरुवार को डुमरिया प्रखंड के लखाइडीह स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय में विशेष शिविर लगाकर 106 विद्यार्थियों की जांच की गयी, जिसमें 13 छात्र पॉजिटिव पाये गये. वहीं, लखाइडीह मध्य विद्यालय में भी 71 बच्चों की जांच में 11 बच्चे संक्रमित मिले. सभी को ऑन-द-स्पॉट दवाइयां दी गयीं.
बुखार आने पर जांच करायें : सिविल सर्जन
जिला सिविल सर्जन डॉ. साहिर पॉल ने आम जनता से अपील की है कि वे इस मौसम में बिल्कुल भी लापरवाही न बरतें. छतों पर रखे टायर, टूटे बर्तनों और कूलरों में पानी जमा न होने दें. रात में सोते समय अनिवार्य रूप से मच्छरदानी का प्रयोग करें और बुखार आने पर झाड़-फूंक या झोलाछाप के चक्कर में पड़ने के बजाय तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में मुफ्त जांच करायें.
