Jamshedpur News :
कोल्हान विश्वविद्यालय (केयू) ने अपने दो प्रमुख व्यावसायिक (वोकेशनल) पाठ्यक्रमों के नामों में बड़ा बदलाव किया है. यह निर्णय विश्वविद्यालय की 44वीं एकेडमिक काउंसिल की बैठक में लिया गया है. आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार फिलहाल शैक्षणिक और व्यावसायिक आवश्यकताओं को देखते हुए पाठ्यक्रमों के नाम बदले गये हैं, ताकि विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर मिल सके. विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस बदलाव से विद्यार्थियों को विषयों की स्पष्ट और व्यापक पहचान मिलेगी, जो उनके करियर के लिए फायदेमंद साबित होगी.इन पाठ्यक्रमों के बदले गये नाम
करीम सिटी कॉलेज (जमशेदपुर) :
यहां संचालित होने वाले मास कम्युनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन पाठ्यक्रम का नाम अब बदलकर जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन कर दिया गया है.बीएससी पाठ्यक्रम :
बीएससी (एनवायरनमेंट एंड वाटर मैनेजमेंट) का नाम अब परिवर्तित कर बीएससी एनवायरनमेंटल साइंस किया गया है.नामांकन के लिए खुला चांसलर पोर्टल
विश्वविद्यालय की नामांकन समिति के निर्णय के आलोक में शैक्षणिक सत्र 2026-30 के चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम और सत्र 2026-29 के वोकेशनल पाठ्यक्रमों में नामांकन की प्रक्रिया भी शुरू हो गयी है. इसके लिए चांसलर पोर्टल 16 जून 2026 से 5 जुलाई 2026 तक खुला रहेगा. विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी अभ्यर्थियों को सख्त हिदायत दी है कि वे चांसलर पोर्टल पर आवेदन करते समय अपार आइडी का उपयोग अनिवार्य रूप से करें. इससे छात्र का नाम, लिंग, जन्मतिथि और अन्य व्यक्तिगत विवरण स्वतः (ऑटोमैटिक) सही रूप में दर्ज हो जायेंगे, जिससे फॉर्म में गलतियों की गुंजाइश खत्म हो जायेगी.को-ऑपरेटिव कॉलेज के बर्सर पद से डॉ. अशोक कुमार रवानी हटाये गये
कोल्हान विश्वविद्यालय ने को-ऑपरेटिव कॉलेज के बर्सर पद पर महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव करते हुए डॉ. अशोक कुमार रवानी को उनके दायित्व से मुक्त कर दिया है. उनकी जगह डॉ. अमर कुमार को कॉलेज का नया बर्सर नियुक्त किया गया है. विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से मंगलवार को इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गयी. जानकारी के अनुसार, कॉलेज प्रशासन में बर्सर का पद अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. संस्थान से जुड़े वित्तीय प्रबंधन, भुगतान संबंधी प्रक्रियाओं तथा विभिन्न आर्थिक मामलों के संचालन में बर्सर की केंद्रीय भूमिका होती है. किसी भी प्रकार के भुगतान, वित्तीय स्वीकृति अथवा आर्थिक लेन-देन को अंतिम रूप देने के लिए प्रिंसिपल और बर्सर दोनों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं. इसी कारण इस पद पर किये गये बदलाव को प्रशासनिक और वित्तीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. विश्वविद्यालय की ओर से जारी आदेश के बाद नये बर्सर के रूप में डॉ. अमर कुमार जल्द ही अपना कार्यभार संभालेंगे. वहीं, डॉ. अशोक कुमार रवानी को पद से हटाये जाने के कारणों का उल्लेख आधिकारिक सूचना में नहीं किया गया है.
