यहां मन्नत मांगते ही खुलते हैं विदेश के द्वार, शादी से लेकर संतान तक पूरी होती है हर मुराद...

जमशेदपुर के बारीडीह में स्थित हजरत बाबा मिस्कीन अली शाह का मजार 'पासपोर्ट वाले बाबा' के नाम से प्रसिद्ध है. यहां लोग विदेश जाने, नौकरी पाने और अन्य मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए पेड़ पर अर्जी टांगते हैं.

जमशेदपुर : विदेश जाकर नौकरी करने का सपना है. पासपोर्ट भी बन गया है, लेकिन विदेश जाने की राह अभी नहीं खुली है. ऐसे में कई लोग बारीडीह के कालू बागान स्थित हजरत बाबा मिस्कीन अली शाह के मजार पहुंचते हैं. यहां अपनी मुराद पूरी होने की उम्मीद में लोग पेड़ पर अर्जी टांगते हैं. विदेश में नौकरी और विदेश जाने की इच्छा रखने वालों में कई लोग अपने पासपोर्ट की फोटो कॉपी भी पेड़ पर टांग देते हैं. इसी अनोखी मान्यता के कारण अब यह मजार इलाके में ‘पासपोर्ट वाले बाबा’ के नाम से भी प्रसिद्ध है. साथ ही शादी व संतान की अर्जी लेकर भी लोग यहां पहुंचते हैं. मान्यता है कि सच्चे दिल से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है.

पेड़ पर टंगी मिलती हैं पासपोर्ट की प्रतियां

पेड़ पर टंगी रहती है प्रतियां.

मजार परिसर में लगे पेड़ पर नजर डालें तो कई तरह के कागज और दस्तावेज दिखाई देते हैं. इनमें पासपोर्ट की प्रतियां भी टंगी रहती हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार विदेश में नौकरी पाने की इच्छा रखने वाले लोग पासपोर्ट की प्रति लगाकर बाबा से अपनी मुराद पूरी होने की दुआ करते हैं. लोगों की आस्था है कि यहां अर्जी लगाने से मनोकामना पूरी होती है.

नौकरी से लेकर शादी और संतान तक की अर्जी

मजार पर आने वालों की मुराद सिर्फ विदेश जाने तक सीमित नहीं है. कोई नौकरी पाने के लिए अर्जी लगाता है, तो कोई शादी के लिए. कई लोग संतान की मन्नत लेकर भी यहां पहुंचते हैं. अपनी इच्छा कागज पर लिखकर लोग उसे पेड़ पर टांग देते हैं.

अच्छे नंबर के लिए एडमिट कार्ड भी टांगते हैं विद्यार्थी

मजार में विद्यार्थियों की अर्जियां भी देखने को मिलती हैं. परीक्षा में अच्छे अंक पाने और सफलता की मन्नत लेकर कई विद्यार्थी अपने एडमिट कार्ड की प्रति पेड़ पर टांगते हैं. स्थानीय मान्यता के अनुसार विद्यार्थी बाबा के दरबार में अपनी सफलता के लिए दुआ करते हैं.

अर्जी में लिखते हैं अपनी इच्छा, नीचे मां का नाम

यहां अर्जी लगाने की एक खास परंपरा भी है. लोग सबसे पहले कागज पर अपनी इच्छा लिखते हैं. इसके नीचे अपनी मां का नाम लिखते हैं. इसके बाद अर्जी को मजार परिसर में मौजूद पेड़ पर टांग देते हैं. पेड़ पर लगी अर्जियां किसी की नौकरी, किसी की शादी, किसी की पढ़ाई तो किसी के विदेश जाने की उम्मीद को बयां करती हैं.

हजरत बाबा मिस्कीन अली शाह का मजार.

गुरुवार और शुक्रवार को जुटती है ज्यादा भीड़

स्थानीय लोगों के मुताबिक गुरुवार और शुक्रवार को मजार पर सबसे ज्यादा भीड़ होती है. इन दिनों अलग-अलग धर्मों के लोग यहां पहुंचते हैं. अपनी मन्नत के लिए दुआ करते हैं. यही वजह है कि यह मजार जमशेदपुर में आस्था और आपसी सौहार्द के एक खास स्थल के रूप में भी पहचान बना चुका है.

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लेखक के बारे में

By साहिल अस्थाना

साहिल अस्थाना पिछले चार वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. पत्रकारिता के दौरान उन्होंने विभिन्न विषयों पर खबरों को कवर करते हुए जमीनी स्तर की रिपोर्टिंग और समाचार लेखन का अनुभव हासिल किया है. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल से बतौर कंटेंट राइटर जुड़े हुए हैं. अपने वर्तमान कार्यक्षेत्र में वह मुख्य रूप से जमशेदपुर और इसके आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को कवर करते हैं. समाचारों को सरल, तथ्यपरक और पाठकों के लिए प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है.

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