प्रमाण-पत्र नहीं, सम्मान चाहिए, झारखंड आंदोलनकारियों के लिए विशेष समारोह की मांग

झारखंड आंदोलनकारी दिल बहादुर ने सम्मान-पत्र वितरण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने प्रशासनिक संवेदनहीनता को दर्शाते हुए इसे आंदोलनकारियों के बलिदान का अपमान बताया है.

जमशेदपुर : झारखंड आंदोलनकारी दिल बहादुर ने शुक्रवार को पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर आंदोलनकारियों के सम्मान-पत्र वितरण प्रक्रिया पर कड़ा एतराज जताया है. उन्होंने प्रखंड विकास पदाधिकारी कार्यालयों में जाति या आय प्रमाण-पत्र की तर्ज पर बांटे जा रहे सम्मान-पत्रों पर रोक लगाने की मांग करते हुए इसे आंदोलनकारियों के आत्मसम्मान और बलिदान का अपमान बताया है.

सामान्य आवेदक जैसा व्यवहार प्रशासनिक संवेदनहीनता

दिल बहादुर ने कहा कि प्रखंड कार्यालयों में जिस तरह सम्मान-पत्र बांटे जा रहे हैं, उससे आंदोलनकारियों में निराशा है. यह कोई सामान्य प्रशासनिक प्रमाण-पत्र नहीं, बल्कि उनके जीवनभर के संघर्ष, जेल-यातना और त्याग की सरकारी स्वीकृति है. सम्मान केवल कागज पर लिखे शब्दों से नहीं, बल्कि उसे प्रदान करने के तरीके और वातावरण से प्रकट होता है. जिन लोगों ने राज्य निर्माण के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया, उनके साथ सामान्य आवेदक जैसा व्यवहार प्रशासनिक संवेदनहीनता को दर्शाता है.

सम्मान समारोह का आयोजन किए जाने की मांग

सौंपे गये ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई है कि जिला प्रशासन की ओर से एक विशेष सम्मान समारोह का आयोजन किया जाये. इस समारोह में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में प्रत्येक आंदोलनकारी को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया जाये. साथ ही, जिन्होंने केंद्रीय या जिला स्तर पर आंदोलन का नेतृत्व किया है, उनके योगदान का मंच से विशेष उल्लेख हो ताकि नई पीढ़ी राज्य के स्वर्णिम इतिहास और अपने नायकों के संघर्षों से भली-भांति परिचित हो सके.

आंदोलनकारियों के लिए बने विशेष प्रोटोकॉल

दिल बहादूर ने आंदोलनकारियों के लिए विशेष प्रोटोकॉल निर्धारित करने की जोरदार वकालत की. उन्होंने कहा कि बुजुर्ग व वरिष्ठ आंदोलनकारियों को दफ्तरों के चक्कर काटने, घंटों इंतजार करने या कतार में खड़ा होने से मुक्त रखा जाये. उनकी आयु, सामाजिक प्रतिष्ठा और ऐतिहासिक भूमिका के अनुरूप ही व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों का सम्मान पूरे झारखंड का सम्मान है. ज्ञापन की प्रतियां राज्यपाल, मुख्यमंत्री और प्रधान सचिव (गृह) को भी आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई हैं.

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लेखक के बारे में

By दशमत सोरेन

दशमत सोरेन ने रांची विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर किया है. वे 29 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उनकी विशेषज्ञता मुख्य रूप से झारखंड की आदिवासी-मूलवासी राजनीति, स्थानीय समुदायों की भाषा-संस्कृति और यहां के सामाजिक ताना-बाना है. वे वर्ष 2010 से प्रभात खबर के साथ एक ट्राइबल रिपोर्टर के रूप में काम कर रहे हैं.

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