30 सितंबर को झारखंड बंद, आपके रोजमर्रा के काम पर कितना पड़ेगा असर..पढ़ें पूरी खबर

झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा ने अपनी मांगों को लेकर 30 सितंबर को झारखंड बंद का आह्वान किया है. 26 साल बाद भी मांगें पूरी न होने से नाराज मोर्चा ने आंदोलन तेज करने का फैसला लिया है. इसके बाद 15 नवंबर से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन की भी चेतावनी दी गई है.

जमशेदपुर: झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा ने अपनी मांगों को लेकर 30 सितंबर को पूरे झारखंड में बंद का आह्वान किया है. राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी मांगें पूरी नहीं होने से नाराज मोर्चा ने आंदोलन तेज करने का फैसला लिया है. बंद को सफल बनाने के लिए पूर्वी सिंहभूम समेत राज्य के विभिन्न जिलों में आंदोलनकारियों की ओर से जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है.

झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के पूर्वी सिंहभूम जिलाध्यक्ष शिबू काली माइती ने बताया कि बंद से पहले 29 सितंबर को राज्यभर में मशाल जुलूस निकाला जायेगा. इसके माध्यम से लोगों से बंद को सफल बनाने के लिए समर्थन मांगा जायेगा.

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26 साल बाद भी मांगें पूरी नहीं होने का आरोप

शिबू काली माइती ने कहा कि अलग झारखंड राज्य बने 26 साल बीत चुके हैं, लेकिन आंदोलनकारियों की मांगों पर अब तक सरकार की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है. उनका कहना है कि जिन आंदोलनकारियों ने अलग राज्य के लिए संघर्ष और त्याग किया, उन्हें ही अपने अधिकारों और सम्मान के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है.

मोर्चा के अनुसार, इसी मुद्दे को लेकर 30 सितंबर को राज्यव्यापी बंद बुलाया गया है. बंद को लेकर संगठन के कार्यकर्ता अलग-अलग क्षेत्रों में लोगों से संपर्क कर रहे हैं.

15 नवंबर से रांची में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन

मोर्चा ने आगे के आंदोलन की भी घोषणा की है. जिलाध्यक्ष ने कहा कि यदि 30 सितंबर के बंद के बाद भी सरकार की ओर से मांगों को लेकर सकारात्मक पहल नहीं की गयी, तो आंदोलन को और तेज किया जायेगा.

उन्होंने बताया कि 15 नवंबर को राज्य स्थापना दिवस के मौके पर राज्यभर के आंदोलनकारी रांची के बिरसा चौक पर जुटेंगे. वहां से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन और प्रदर्शन शुरू करने की घोषणा की गयी है.

मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि आंदोलनकारियों की मांगों पर निर्णय होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही गयी है. 30 सितंबर के बंद और इसके बाद प्रस्तावित आंदोलन को लेकर संगठन की ओर से तैयारियां शुरू कर दी गयी हैं.

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लेखक के बारे में

By दशमत सोरेन

दशमत सोरेन ने रांची विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर किया है. वे 29 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उनकी विशेषज्ञता मुख्य रूप से झारखंड की आदिवासी-मूलवासी राजनीति, स्थानीय समुदायों की भाषा-संस्कृति और यहां के सामाजिक ताना-बाना है. वे वर्ष 2010 से प्रभात खबर के साथ एक ट्राइबल रिपोर्टर के रूप में काम कर रहे हैं.

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