टाइगर एस्टिमेशन 2026 :
सर्वेक्षण में उत्साहवर्धक संकेत, ट्रैप कैमरे में कैद हुए तेंदुए
jamshedpur news :
नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया के नेतृत्व में देशभर में चल रहे टाइगर एस्टिमेशन (बाघ गणना) 2026 के तहत झारखंड के कोल्हान प्रमंडल के जंगलों में भी वन्यजीवों का व्यापक सर्वेक्षण किया गया. इस दौरान दलमा और सारंडा समेत पूरे क्षेत्र में मांसाहारी और शाकाहारी जानवरों की गिनती की गयी, जिसमें कई सकारात्मक संकेत सामने आये हैं.सारंडा और दलमा में दिखे तेंदुए
इस सर्वेक्षण के दौरान सारंडा और दलमा क्षेत्र में तेंदुओं की मौजूदगी दर्ज की गयी है. जानकारी के अनुसार, सारंडा के समठा रेंज में अलग-अलग ट्रैप कैमरों में कुल चार बार तेंदुए कैद हुए. ये तेंदुए 15 और 20 जनवरी को कैमरों में दिखाई दिये. दलमा रेंज में भी दो तेंदुओं की मौजूदगी के पुख्ता सबूत मिले हैं. बताया जा रहा है कि कुछ समय पहले तेंदुआ क्षेत्र से गायब हो गया था, लेकिन अब दोबारा उसके मूवमेंट का पता चला है, जो संरक्षण के लिहाज से बेहद उत्साहवर्धक माना जा रहा है.हायना की संख्या में भी बढ़ोतरी
टाइगर एस्टिमेशन के दौरान यह भी सामने आया है कि तेंदुए के साथ-साथ हायना की संख्या में भी वृद्धि दर्ज की गयी है. विशेषज्ञों के अनुसार, आमतौर पर बाघों के इलाकों में तेंदुआ और हायना जैसे मांसाहारी जीव कम देखे जाते हैं, ऐसे में इनका मिलना पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन का संकेत माना जा रहा है.हाथी से लेकर चीतल जैसे वन्यजीवों की भरमार
गणना के दौरान कोटरा, स्कैट, जंगली सूअर, लोमड़ी, बार्किंग डियर, खरगोश, सियार, चीतल के अलावा हाथियों की भी अच्छी-खासी संख्या दर्ज की गयी है. यह दर्शाता है कि कोल्हान के जंगलों में शिकार प्रजातियों की उपलब्धता बनी हुई है.आधुनिक तकनीक से हो रही है गणना
इस सर्वेक्षण में आधुनिक तकनीकों का व्यापक इस्तेमाल किया गया. जंगलों में ट्रैप कैमरे लगाये गये, पगमार्क का रिकॉर्ड रखा गया, लीद और डीएनए सैंपल एकत्र किये गये. इसके अलावा ड्रोन और सैटेलाइट तकनीक की मदद से बाघों, उनके आवास और शिकार प्रजातियों की स्थिति का विस्तृत डेटा जुटाया जा रहा है. टाइगर एस्टिमेशन से जुड़े सभी सैंपल और डाटा को वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया भेजा जा रहा है, जहां विस्तृत अध्ययन के बाद जानवरों की वास्तविक संख्या सामने आयेगी.छात्रों की भी रही अहम भूमिका
इस गणना प्रक्रिया में कोल्हान विश्वविद्यालय से जुड़े विभिन्न कॉलेजों के जीव विज्ञान के छात्रों ने भी हिस्सा लिया. तकनीकी तरीके से जांच की गयी और ट्रैप कैमरों के संचालन में छात्रों ने सक्रिय भूमिका निभायी.चार वर्ष में एक बार होती है गणना
गौरतलब है कि यह वन्यजीव गणना हर चार वर्ष में एक बार की जाती है. वर्ष 2026 की यह गणना इसलिए खास मानी जा रही है, क्योंकि इससे यह स्पष्ट होगा कि बीते वर्षों में किये गये संरक्षण प्रयास कितने प्रभावी रहे हैं.कोट……….
कोल्हान में गणना के दौरान काफी उत्साहवर्धक तस्वीरें सामने आयी हैं. सैंपलिंग पूरी कर उन्हें भेजा जा चुका है. विस्तृत अध्ययन के बाद ही नयी जानकारी सामने आएगी. हमारी ओर से प्रयास किया गया है कि सही और वैज्ञानिक आंकड़े सामने आएं.– स्मिता पंकज, कोल्हान की क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक (आरसीसीएफ)B
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