jamshedpur news : हाइड्रोजन ट्रकों के लिए सरकार के साथ मिलकर रोडमैप तैयार कर रही टाटा मोटर्स : राजेश कौल

बोले बिजनेस हेड- 2047 तक जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य, हाइवे पर बनेंगे चार्जिंग स्टेशन

बोले बिजनेस हेड- 2047 तक जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य, हाइवे पर बनेंगे चार्जिंग स्टेशन

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टाटा मोटर्स कमर्शियल व्हीकल के वाइस प्रेसिडेंट (मार्केटिंग एंड सेल्स) सह बिजनेस हेड राजेश कौल ने भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा को लेकर कंपनी की बड़ी योजना का खुलासा किया है. नयी दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ””प्रभात खबर”” संवाददाता से विशेष बातचीत में उन्होंने बताया कि टाटा मोटर्स हाइड्रोजन ट्रकों के संचालन के लिए केंद्र सरकार के नवीन व नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के साथ मिलकर नीतियां और रोडमैप तैयार करने पर काम कर रहा है. इसमें हाइड्रोजन फिलिंग स्टेशन के संचालन और एक मजबूत इको-सिस्टम तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है.

1.8 टन अधिक पेलोड और 7% बेहतर माइलेज

राजेश कौल ने बताया कि टाटा मोटर्स के नये ट्रक भारतीय सड़कों और बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाये गये हैं. इन ट्रकों की भार वहन क्षमता (पेलोड) सामान्य ट्रकों की तुलना में 1.8 टन अधिक है. इससे कृषि, माइनिंग और एफएमसीजी क्षेत्र की कंपनियों की कमाई बढ़ेगी और लागत में कमी आयेगी. इसके साथ ही ड्राइवट्रेन अपग्रेड और आधुनिक डीजल इंजन की बदौलत ईंधन दक्षता (माइलेज) में 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी.

संपूर्ण सेवा 2.0 : 10 साल तक फ्लीट मैनेजमेंट सपोर्ट

ग्राहकों की सुविधा के लिए कंपनी ने संपूर्ण सेवा 2.0 लॉन्च किया है. इसके तहत ग्राहकों को 10 साल या 10 लाख किलोमीटर तक फ्लीट मैनेजमेंट सपोर्ट दिया जायेगा. इसके साथ सप्ताह के सातों दिन और 24 घंटे तकनीकी सहायता उपलब्ध रहेगी. कनेक्टेड फ्लीट एज सेवाएं, ड्राइवरों को विशेष प्रशिक्षण और कल-पुर्जों की आसान उपलब्धता सुनिश्चित की जायेगी

हाइवे पर हर 50-100 किमी पर बनेंगे चार्जिंग स्टेशन

राजेश कौल ने बताया कि टाटा मोटर्स 2047 तक जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश कर रही है. कंपनी केंद्र सरकार और निजी एजेंसियों के साथ मिलकर राष्ट्रीय राजमार्गों पर हर 50 से 100 किलोमीटर पर चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने में सहयोग कर रही है. कंपनी का उद्देश्य न केवल बेहतर वाहन देना है, बल्कि एक ऐसा सुरक्षित और टिकाऊ परिवहन तंत्र विकसित करना है, जो पर्यावरण के अनुकूल हो.

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Author: AKHILESH KUMAR

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