jamshedpur news : टाटा स्टील के नये बिजली टैरिफ का विरोध, बिजली कनेक्शन देने में मुुंह देखा-देखी का आरोप

राज्य विद्युत नियामक आयोग ने सभी पक्षों को सुनने के बाद निर्णय देने का भरोसा दिया

राज्य विद्युत नियामक आयोग ने सभी पक्षों को सुनने के बाद निर्णय देने का भरोसा दिया

jamshedpur news :

टाटा स्टील द्वारा बिजली दर बढ़ाने को लेकर झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग (जेएसइआरसी) को दिये गये आवेदन पर मंगलवार को गोलमुरी क्लब में सुनवाई हुई. इस दौरान बिजली टैरिफ का विरोध किया गया. साथ ही बिजली कनेक्शन देने में मुंह देखा-देखी करने तक का आरोप लगाया. आयोग के चेयरमैन न्यायमूर्ति नवनीत कुमार और विधि सदस्य महेंद्र प्रसाद ने पूरे मामले को सुना और कहा कि वे लोग इस मामले में सुनवाई करेंगे और सभी की बातों को सुनने के बाद ही कोई फैसला लेंगे.

इससे पहले टाटा स्टील लिमिटेड के जमशेदपुर टाउनशिप के लिए 2024-25 का ट्रू-अप और 2025-26 के लिए एनुअल परफार्मेंस रिव्यू, 2026-27 से 2030-31 तक मल्टी इयर टैरिफ निर्धारण के लिए सुनवाई की. इस दौरान टाटा स्टील लिमिटेड की ओर से कहा गया कि कंपनी के रेवन्यू गैप को पूरा करने के लिए टैरिफ में वृद्धि जरूरी है. इसके तहत कंपनी ने मंथली चार्ज और फिक्सड चार्ज पर 12 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव रखा है. एनर्जी चार्ज पर भी 6 फीसदी वृद्धि का प्रस्ताव रखा है. कंपनी ने आने वाले समय में उपभोक्ताओं पर अचानक पड़ने वाले भार के बजाएं क्रमश: दर वृद्धि की बात कही.

शुल्क बढ़ोतरी की जगह कमी होनी चाहिएकंपनी के प्रस्ताव के बाद आम नागरिकों ने भी अपने विचार रखे. सोनारी के रहने वाले अशोक बियानी, सामाजिक कार्यकर्ता जवाहर लाल शर्मा, नीकिता कुमार, राजेश कुमार समेत कई नागरिकों ने कहा कि कंपनी के मंथली और फिक्सड चार्ज पर वृद्धि और एनर्जी चार्ज में भी वृद्धि के प्रस्ताव से नागरिकों पर भारी बोझ पड़ेगा. नागरिकों की परेशानी को ध्यान में रखते हुए ही निर्णय लिया जाए. सुनवाई के दौरान एक व्यक्ति ने शिकायत की कि उन्होंने लाखों रुपये जमा कर दिया है, लेकिन उनको बिजली का कनेक्शन नहीं दिया गया. इस पर कंपनी के अधिकारी ने कहा कि ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट नहीं देने के कारण ऐसा हुआ है. इस पर सामाजिक कार्यकर्ता जवाहरलाल शर्मा ने कहा कि शहर में बिजली-पानी देने में मुंह देखा-देखी की गयी है. आज करोड़ों की संपत्ति पर बुलडोजर से गिरने की कार्रवाई का डर है, जिसका जिम्मेदार टाटा स्टील और जेएनएसी है. जेएनएसी खुद अवैध है और वह ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट दे नहीं सकती है. ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट कितने लोगों से लेकर बिजली दी गयी थी, इस सवाल पर अधिकारी अनुत्तरित हो गये. सुनवाई में उन्होंने बिजली शुल्क में किसी भी बढ़ोतरी का विरोध करते हुए मांग की कि दरों में कमी की जाए. शर्मा ने कहा कि टाटा पावर ने तीसरी तिमाही में 1194 करोड़ और दूसरी तिमाही में 1245 करोड़ का शुद्ध लाभ कमाया है, यानी कुल 2439 करोड़ का मुनाफा. दोनों कंपनियां एक ही ग्रुप की हैं, इसलिए कोई घाटा नहीं है. ऐसे में शुल्क बढ़ोतरी का कोई औचित्य नहीं, बल्कि कमी होनी चाहिए. जवाहरलाल शर्मा ने टाटा स्टील के लीज एग्रीमेंट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि कंपनी शहर के नागरिकों को बिजली, पानी जैसी सुविधाएं नहीं दे रही, जबकि ओडिशा के कुछ नगर निगमों में ढाई लाख परिवारों को ऐसी सुविधाएं देने का वादा किया गया है.

कंपनी का पक्षटाटा स्टील लिमिटेड में सीनियर जीएम (इलेक्ट्रिक सर्विस) बीपी सिंह का कहना है कि टैरिफ बढ़ाना कंपनी की आवश्यकता है. रेवन्यू गैप बढ़ने से आने वाले समय में अचानक उपभोक्ताओं पर भार पड़ेगा. ऐसे में क्रमश: टैरिफ बढ़ाना ही होगा. वहीं जहां तक जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति और कोर्ट से निर्देश के बाद ही बिजली सुविधा देने में सतर्कता बरती जा रही है. ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट नहीं होने के कारण लगभग 200 भवनों का बिजली कनेक्शन लंबित है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: AKHILESH KUMAR

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >