jamshedpur news : दुकानदारों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था का छह सप्ताह में जवाब दे रेलवे : हाइकोर्ट

हाइकोर्ट ने दुकानदारों को चार सप्ताह में खुद से दुकानें खाली करने का दिया आदेश

टाटानगर स्टेशन से कीताडीह सड़क व गोलपहाड़ी से हटायी जानी हैं दुकानें

हाइकोर्ट ने दुकानदारों को चार सप्ताह में खुद से दुकानें खाली करने का दिया आदेश

jamshedpur news :

टाटानगर स्टेशन से कीताडीह सड़क पर से दुकानों को हटाने के मामले में बड़ी राहत की खबर झारखंड हाइकोर्ट से आयी. हाइकोर्ट के जस्टिस राजेश कुमार की अदालत ने कीताडीह और गोलपहाड़ी के दुकानदारों की सुनवाई की. इस दौरान याचिकाकर्ताओं की दलीलों को हाइकोर्ट ने मान लिया और आदेश दिया कि रेलवे चार सप्ताह का वक्त दुकानदारों को दे, ताकि वे लोग खुद से दुकान खाली कर सकें. साथ ही रेलवे को भी दुकानदारों के पुनर्स्थापन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की योजना का शपथ पत्र छह सप्ताह में दायर करने के लिए कहा.

याचिकाकर्ता शौकत अली, दिलीप कुमार शर्मा, अनिल चंद्र, दीपक अधिकारी व अन्य ने हाइकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि वे लोग खुद से दुकानों को खाली करने को तैयार हैं. लेकिन, वे लोग 50 से 70 सालों से वहां कारोबार कर रहे हैं. उनको हटाने का समय दिया जाये और हटाकर उनको रेलवे स्टेशन के आसपास ही कहीं बसा दिया जाये, ताकि उनकी आजीविका चल सके. इन लोगों ने कहा कि जमीन की जरूरत रीडेवलपमेंट प्लान के लिए है, तो वे लोग जमीन को खुद से खाली करने को तैयार हैं. लेकिन, इसके लिए वैकल्पिक बसाने का इंतजाम रेलवे को करना चाहिए, ताकि उनके परिवार की रोजी-रोटी चल सके. इस मामले में जस्टिस राजेश कुमार की अदालत ने आदेश दिया कि चार सप्ताह में दुकानदार खुद से पूरे एरिया को खाली कर दें. रेलवे को एक शपथ पत्र दायर करने को कहा है, जिसमें कहा गया है कि 6 सप्ताह में रेलवे हाइकोर्ट को बताये कि रेलवे का विस्थापन या पुनर्स्थापन की क्या योजना है. रेलवे की खाली जमीन कहां है, जो विस्तारीकरण के बाहर हो और वहां दुकानों को फिर से बसाया जा सके. इसके बाद इस मामले की सुनवाई की अगली तिथि 12 मार्च 2026 निर्धारित की गयी है. इस बीच तक किसी तरह का कोई दंडात्मक कार्रवाई करने पर रोक लगायी गयी है.

गौरतलब है कि टाटानगर रेलवे स्टेशन का विस्तारीकरण किया जाना है. इस विस्तार के कारण टाटानगर स्टेशन से कीताडीह जाने वाले रोड की 37 दुकानों और गोलपहाड़ी की पांच दुकानों को तोड़ा जाना है. अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा चुकी है. 14 दुकानें हट चुकी हैं, जबकि बची दुकानों को अब तक नहीं हटाया जा सका है. कई लोग इस बीच हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाये हैं.

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Author: AKHILESH KUMAR

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