– घरेलू बाजार में 45% हिस्सेदारी के साथ आज भी ””लीडर”” है प्लांट
jamshedpur news :
टाटा स्टील के साथ विलय के बाद टाटा स्टील टिनप्लेट डिवीजन (पूर्व में टिनप्लेट कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड ) अपनी उत्पादन क्षमता में तेजी से विस्तार के साथ विकास के अगले स्तर पर कदम बढ़ा रहा है. 2026 में कंपनी अपने 1,787 करोड़ के महत्वाकांक्षी विस्तारीकरण प्रोजेक्ट को पूरा करने जा रही है. 15 जनवरी 2024 को मूल कंपनी को टाटा स्टील लिमिटेड में विलय के बाद टाटा स्टील टिनप्लेट डिवीजन से नया नाम और पहचान मिली है. प्रथम विश्व युद्ध के दौरान उपजी चुनौतियों के बीच 20 जनवरी 1920 को इस प्लांट की नींव पड़ी थी. 1922 में देश को पहला ””मेड इन इंडिया”” टिनप्लेट देने वाली यह इकाई वर्तमान में भारतीय घरेलू टिनप्लेट बाजार में 45% से अधिक हिस्सेदारी के साथ ”लीडर” बनी हुई है. अब नयी तकनीक के आने से टाटा स्टील टिनप्लेट डिवीजन का उत्पादन बढ़ने के साथ जमशेदपुर के औद्योगिक मानचित्र पर स्थिति और भी मजबूत होगी.उत्पादन क्षमता में 3 लाख टन का होगा इजाफा
कंपनी वर्तमान में 4,15,000 टन प्रति वर्ष टिनप्लेट का उत्पादन कर रही है. विस्तारीकरण के तहत अत्याधुनिक तकनीक वाला नया प्लांट स्थापित किया जा रहा है, जिसकी क्षमता 3 लाख टन प्रति वर्ष होगी. इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद कंपनी की कुल उत्पादन क्षमता बढ़कर 7,15,000 टन प्रति वर्ष हो जायेगी. यह नया प्लांट पूरी तरह से पर्यावरण अनुकूल होगा. विस्तारीकरण प्रोजेक्ट न केवल कंपनी का मुनाफा बढ़ायेगा. बल्कि, स्थानीय स्तर पर आर्थिक रूप से समृद्धि भी करेगा. इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से 600 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे.एशिया की पहली टिनप्लेट फैक्ट्री
कंपनी की शुरुआत के पीछे एक साहसिक निर्णय की कहानी है. प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारत में खाद्य तेल के डिब्बे बनाने वाली टिनप्लेट का आयात बंद हो गया था. इस संकट को अवसर में बदलते हुए द बर्मा ऑयल कंपनी और टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी ने हाथ मिलाया और 20 जनवरी 1920 को गोलमुरी में एशिया की पहली टिनप्लेट फैक्ट्री की आधारशिला रखी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
