jamshedpur news : शहर में नेहरू युग से महक रही गुलाबों की खुशबूवाली विरासत

गुलाब बाग में 1580 से अधिक पौधों में खिले गुलाब फूल हर किसी को कर रहा मोहित

गुलाब बाग में 1580 से अधिक पौधों में खिले गुलाब फूल हर किसी को कर रहा मोहित

jamshedpur news :

जब भी गुलाबों की खूबसूरती और खुशबू की चर्चा होती है, तो झारखंड में जमशेदपुर का रोज गार्डेन स्वतः ही सुर्खियों में आ जाता है. यह राज्य का पहला और अनोखा गुलाब बाग है, जिसकी जड़ें शहर के इतिहास और टाटा स्टील की विरासत से गहराई से जुड़ी हुई हैं. गुलाबों से जमशेदपुर का यह नाता वर्ष 1958 से चला आ रहा है, जब टाटा स्टील के गोल्डन जुबिली वर्ष में जुबिली पार्क का उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने किया था. गुलाबों के शौकीन नेहरू जी को उस समय जुबिली पार्क में विकसित गुलाब बाग विशेष रूप से भेंट किया गया था, जहां करीब एक हजार किस्म के देसी गुलाब लगाये गये थे.

यहां के गुलाब नियमित रूप से नेहरू जी तक भेजे जाते थे, जिन्हें वे अपने कोट में सजाया करते थे. समय के साथ पार्क का स्वरूप बदला और गुलाब बाग को स्थानांतरित कर कॉन्वेंट स्कूल के पास दोराबजी पार्क के समीप विकसित किया गया, जो आज आधुनिक स्वरूप में लोगों को आकर्षित कर रहा है. करीब दो वर्ष पहले विकसित इस नये रोज गार्डेन में लगभग 6000 वर्ग मीटर क्षेत्र में 1580 से अधिक गुलाब के पौधे लगाये गये हैं. यहां हाइब्रिड टी, फ्लोरीबुंडा, ग्रैंडिफ्लोरा, मिनिएचर और पॉलीऐंथस जैसे पांच प्रमुख समूहों के गुलाब देखने को मिलते हैं. यहां सफेद, गुलाबी, लाल, संतरी, पीले, मेजेंडा और गाढ़े लाल रंगों के खिले गुलाब हर किसी को मोहित कर लेते हैं.

टाटा स्टील, टाटा स्टील यूआइएसएल और हॉर्टिकल्चर सोसाइटी द्वारा इस गार्डेन का रखरखाव किया जाता है. यह प्रतिदिन शाम चार बजे से रात आठ बजे तक आम लोगों के लिए खुला रहता है और फोटोग्राफी प्रेमियों के बीच खासा लोकप्रिय है.

गुलाब रिसर्च सेंटर और खेती से बढ़ेगी पहचान

जमशेदपुर को गुलाब प्रेमियों के नक्शे पर और मजबूत करने के लिए जुबिली पार्क में गुलाब रिसर्च सेंटर, यानी रोज ट्रायल ग्राउंड स्थापित करने की योजना है. इस पर टाटा स्टील और हॉर्टिकल्चर विभाग ने नेशनल रोज फेडरेशन को सहमति दी है. यहां भारत में पायी जाने वाली विभिन्न किस्मों के गुलाबों पर शोध किया जायेगा.

पूर्वी सिंहभूम में हर साल 15.37 टन गुलाब की पैदावार

इधर, पूर्वी सिंहभूम जिला अब सिर्फ इस्पात नगरी नहीं, बल्कि फूलों की खेती के लिए भी पहचान बना रहा है. जिले में लगभग 120 हेक्टेयर में फूलों की खेती होती है, जिसमें 50 हेक्टेयर में गुलाब की खेती होती है और सालाना करीब 15.37 टन गुलाब का उत्पादन किया जाता है. इस साल नेशनल हार्टिकल्चर मिशन के तहत गुलाब की खेती को भी शामिल किया गया है. हार्टिकल्चर पदाधिकारी अनिमा लकड़ा के अनुसार, किसानों को प्रशिक्षण देकर गुलाब की पैदावार और आमदनी बढ़ाने की दिशा में प्रयास किये जा रहे हैं.

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By AKHILESH KUMAR

AKHILESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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