मुगल काल से आधुनिक भारत तक सिक्कों में दर्ज इतिहास को सहेजा, रतन टाटा ने भी की थी सराहना, जानें जमशेदपुर के इस युवक की कहानी

जमशेदपुर के डॉ. देबब्रत गिरि ने 7 साल की उम्र से 12 हजार से अधिक ऐतिहासिक वस्तुओं को इकट्ठा करने का जुनून पाला है। उनके घर में सिक्कों, मुद्राओं और दुर्लभ कलाकृतियों का एक अनूठा संग्रहालय तैयार हुआ है, जो भारत के बदलते इतिहास की कहानी कहता है।

जमशेदपुर : सिक्के सिर्फ धातु के टुकड़े नहीं होते. उन पर उकेरी गई लिपियां, राजाओं के नाम, धार्मिक प्रतीक, चित्र और वर्ष किसी देश और समाज के बदलते इतिहास की कहानी कहते हैं. जमशेदपुर के डॉ. देबब्रत गिरि ने इसी सोच को अपनी जिंदगी का जुनून बना लिया. टाटा मोटर्स में डिप्टी जनरल मैनेजर के पद पर कार्यरत डॉ. गिरि आठ वर्ष की आयु से ऐतिहासिक वस्तुओं को जुटाने, संरक्षित करने और उनका दस्तावेजीकरण करने में लगे हैं. आज उनके घर में 12 हजार से अधिक ऐतिहासिक वस्तुओं का अनूठा संग्रहालय आकार ले चुका है.

एक साथ देखने मिलती है शासकों व आधुनिक भारत की मुद्रा

उनके संग्रह की सबसे बड़ी खासियत है भारतीय और विदेशी सिक्कों तथा कागजी मुद्रा का विशाल संसार. इसमें अलग-अलग कालखंडों, शासकों, रियासतों और देशों की मुद्राएं शामिल हैं. प्राचीन भारतीय इतिहास से लेकर ब्रिटिश और आधुनिक भारत तक की मुद्रा यहां एक साथ देखने को मिलती है. हर सिक्का अपने समय की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों का दस्तावेज नजर आता है.

इन सिक्कों का भी संग्रह.

आठ साल की उम्र में शुरू हुआ सफर

डॉ. देबब्रत गिरि ने प्रभात खबर से खास बातचीत में बताया - महज आठ वर्ष की उम्र में पुराने सिक्के, नोट और डाक टिकट जमा करना शुरू किया था. बचपन में शुरू हुई जिज्ञासा धीरे-धीरे संग्रह के जुनून में बदलती चली गई. परिवार और परिचितों के सहयोग से अलग-अलग स्थानों से पुराने सिक्के और ऐतिहासिक वस्तुएं मिलने लगीं. समय के साथ अपने संग्रह को व्यवस्थित रूप दिया.

संग्रह में स्टांप पेपर, रत्न व कई ऐतिहासिक वस्तुएं

आज उनका संग्रह केवल सिक्कों तक सीमित नहीं है. इसमें भारतीय और विदेशी कागजी मुद्रा, डाक टिकट, फर्स्ट डे कवर, पोस्टकार्ड, मेडल, प्राचीन हथियार, लेखन सामग्री, माचिस की डिब्बियां और लेबल, स्टांप पेपर, रत्न तथा कई अन्य दुर्लभ ऐतिहासिक वस्तुएं शामिल हैं.

सिक्कों में दर्ज है भारत के बदलते दौर की कहानी

डॉ. गिरि के अनुसार, मुद्राशास्त्र इतिहास को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है. किसी सिक्के पर मौजूद चित्र, लिपि, प्रतीक, धातु, शासक का नाम और जारी होने का समय उस दौर की कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने लाते हैं. उनके संग्रह में भारतीय रियासतों की मुद्राओं के साथ ब्रिटिश भारत और स्वतंत्र भारत की मुद्रा भी शामिल है. सिक्कों के साथ प्राचीन बिल, तांबे के समझौते, पदक और मुद्रा के विकास से जुड़ी वस्तुओं को भी संरक्षित किया गया है.


सिक्कों पर रामायण की दिखती है झलक.

सिक्कों पर रामायण की झलक

डॉ. देबब्रत गिरि के विशाल संग्रह में भगवान राम, हनुमान और रामायण से जुड़े सिक्के व मंदिर टोकन विशेष आकर्षण का केंद्र हैं. संग्रह में 1890 से 1949 के बीच के ऐसे दुर्लभ सिक्के और टोकन शामिल हैं, जिन पर राम, हनुमान और रामायण से जुड़े चित्र एवं धार्मिक प्रतीक दिखाई देते हैं. इनमें कुछ ऐसे टोकन भी हैं, जिनका संबंध मंदिरों और धार्मिक आयोजनों से रहा है. रामायण से जुड़े इस संग्रह की खासियत यह है कि इसमें धार्मिक आस्था के साथ-साथ उस दौर की कला, मुद्रण, प्रतीकों और सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन की झलक भी दिखाई देती है.

एक घर में 18 अलग-अलग गैलरियां

डॉ. गिरि ने अपने संग्रह को अलग-अलग विषयों के आधार पर व्यवस्थित किया है. इनमें भारतीय सिक्के और कागजी मुद्रा, विदेशी मुद्रा, रामायण, भारत एवं देशभक्ति, महात्मा गांधी-नेताजी सुभाष चंद्र बोस-रवींद्रनाथ टैगोर, भारतीय सेना के मेडल, फिलाटेली, माचिस के लेबल व डिब्बियां, मुद्रा का विकास, भारत में लेखन सामग्री का विकास, प्राचीन वस्तुएं, रत्न, टाटा विरासत और ब्रिटिश भारत के पोस्टकार्ड जैसी गैलरियां शामिल हैं.

राष्ट्रीय स्तर पर मिल चुके हैं कई सम्मान

तीन दशक से अधिक समय से चल रहे इस संग्रह और संरक्षण कार्य को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है. डॉ. गिरि को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम अवॉर्ड, नेशनल प्राइड अवॉर्ड और इंडिया एक्सीलेंस अवॉर्ड समेत कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं. मुद्राशास्त्र और फिलाटेली के क्षेत्र में भी उन्हें विभिन्न पुरस्कार मिले हैं. इससे पहले उन्हें Youngest Numismatist of India की उपाधि से भी सम्मानित किया जा चुका है.

रतन टाटा ने की थी सराहना.

रतन टाटा ने भी सराहा था

डॉ. देबरत गिरी के प्रयासों की उद्योगपति और टाटा समूह के चेयरमैन एमेरिटस रतन टाटा ने भी सराहना की थी. 19 जुलाई 2023 को रतन टाटा के कार्यालय की ओर से भेजे गए एक इमेल में उनके संग्रह और वर्षों से किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की गई थी. रतन टाटा ने डॉ. गिरी के टाटा समूह से संबंधित संग्रह को देखकर प्रसन्नता व्यक्त की. उन्होंने संग्रह को तैयार करने में डॉ. गिरी द्वारा लगाए गए समय और मेहनत की भी सराहना की थी.

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लेखक के बारे में

By साहिल अस्थाना

साहिल अस्थाना पिछले चार वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. पत्रकारिता के दौरान उन्होंने विभिन्न विषयों पर खबरों को कवर करते हुए जमीनी स्तर की रिपोर्टिंग और समाचार लेखन का अनुभव हासिल किया है. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल से बतौर कंटेंट राइटर जुड़े हुए हैं. अपने वर्तमान कार्यक्षेत्र में वह मुख्य रूप से जमशेदपुर और इसके आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को कवर करते हैं. समाचारों को सरल, तथ्यपरक और पाठकों के लिए प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है.

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