Jamshedpur News : जैसलमेर बस हादसा है आइ ओपनर, जमशेदपुर से खुलने वाली स्लीपर और एसी बसों में नहीं है कोई सुरक्षात्मक इंतजाम

Jamshedpur News : जैसलमेर में बस में आग लगने से 21 से अधिक लोगों की मौत जलकर हो गयी. इस घटना में यह बातें सामने आयी कि बस में कई सारे सामान थे, जिसमें पटाखे भी हो सकते हैं, जिस कारण आग भड़की और 21 लोगों की जान चली गयी.

बसों में सवारी के साथ होती है माल ढुलाई, नहीं होती है चेकिंग

अत्यधिक लोड की वजह से कई बार घटती है बस पलटने की घटना

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जैसलमेर में बस में आग लगने से 21 से अधिक लोगों की मौत जलकर हो गयी. इस घटना में यह बातें सामने आयी कि बस में कई सारे सामान थे, जिसमें पटाखे भी हो सकते हैं, जिस कारण आग भड़की और 21 लोगों की जान चली गयी. हालांकि, यह जांच का विषय है. लेकिन फिलहाल, इस घटना ने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया है और बसों की सुरक्षा को लेकर फिर से सोचने को मजबूर किया है. जमशेदपुर से रोजाना बड़ी संख्या में एसी और स्लिपर बसें खुलती हैं. शहर से बिहार, यूपी, ओडिशा और बंगाल के लिए करीब 38 से अधिक बसें खुलती है. इन सारी बसों में माल की ढुलाई भी की जाती है. बसों के ऊपर बोरा और अन्य सामान लदे रहते हैं, जिसकी कोई चेकिंग तक नहीं होती है कि आखिर बसों में क्या सामान जा रहा है. कभी-कभार गुप्त सूचना पर पुलिस कार्रवाई करती है. बसों में अत्यधिक लोड होना भी बस पलटने जैसी घटना का करण बनता है. ऐसे में इस तरह के लोडिंग को भी रोकने की कोई व्यवस्था नहीं है. ऐसे में आप समझ सकते हैं कि बसों से सफर करना कितना सुरक्षित है.

स्लीपर और एसी बसों में सुरक्षात्मक कोई इंतजाम नहीं

स्लीपर और एसी बसों में कोई आपातकाल द्वार तक नहीं होता है. सिर्फ एक ही दरवाजा होता है. तय निमय के मुताबिक, 30 लेटने वाली या 15 लेटने और 32 बैठने की सीटें तय है. लेकिन इमरजेंसी दरवाजा को बंद कर उसमें 36 लेटने की जगह बना दिया जाता है. मिश्रित बस में 18 स्लीपर बना दिया जाता है. बैठने की संख्या को 32 से बढ़ाकर 50 कर दिया जाता है. बस में 47 लोग होने चाहिए, लेकिन 65 से अधिक लोग सफर करते हैं. ऊपर से माल लाद लिया जाता है.

क्या कहते हैं बस ऑनर

बसों में सुरक्षा इंतजाम किये जाते हैं. आरटीओ और डीटीओ के अलावा हर स्तर पर बसों की चेकिंग की जाती है. तय नियमों में कुछ नियम में हो सकता है कि अवहेलना हुई हो. लेकिन अधिकांश व्यवस्था की गयी है. अगर कोई सुधार की जरूरत होगी, तो की जायेगी.

उदय शर्मा, अध्यक्ष, जमशेदपुर बस ऑनर्स एसोसिएशन

क्या कहते हैं जिम्मेदार

बसों की सुरक्षा को लेकर जांच की जाती है. हम लोगों ने कई बार जांच कर कार्रवाई भी की है. कई सुधार कराये हैं. फिर से मामले की जांच की जायेगी. अगर कोई गलत तरीके से बसों का संचालन हो रहा है, तो कार्रवाई होगी.

धनंजय, डीटीओ, जमशेदपुर

एसी बसों में क्या होने चाहिए सुरक्षा के उपाय?, क्या है वस्तुस्थिति

हर बस में कम से कम दो, एक आगे और एक पीछे फायर एक्सटिंग्विशर रहना चाहिए. – नियम के तहत यह लगा है.

कम से कम एक दरवाजा और वैसी खिड़कियां जिससे लोग बाहर निकल सकें, यानी इमरजेंसी एग्जिट होना चाहिए. -एक ही दरवाजा बसों में है.

ग्लास ब्रेक हैमर होना जरूरी है. हर खिड़की के पास हैमर रहे, ताकि जरूरत पड़ने पर शीशा तोड़ा जा सके. -बसों में ऐसा कोई इंतजाम नहीं है.

फायर-रेसिस्टेंट मटीरियल से सीट, पर्दे और वायरिंग बनाये जाने हैं. – बसों में सामान्य ज्वलनशील नायलॉन के कपड़े का इस्तेमाल होता है.

इमरजेंसी लाइटिंग होनी चाहिए. बिजली फेल होने पर स्वतः जलने वाली बैकअप लाइटें. -यह व्यवस्था है.

सीसीटीवी कैमरे होनी चाहिए, जिससे बस के अंदर और बाहर की निगरानी हो सके. -कुछ बसों में इंतजाम है.

जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम हों, ताकि बस की लोकेशन रियल-टाइम में ट्रैक की जा सके. -यह सिस्टम नहीं लगी है.

ऑटोमेटिक फायर अलर्ट सेंसर लगा होना चाहिए, ताकि आग या धुआं फैलते ही तुरंत अलार्म बजे. – ऐसा कोई इंतजाम नहीं हैस्पीड गवर्नर लगना चाहिए, ताकि बस की गति पर नियंत्रण हो सके. – ऐसी कोई व्यवस्था नहीं हैआरटीओ को हर 6 महीने में बसों की सुरक्षा ऑडिट करनी चाहिए. – सिर्फ कागजों में यह साइन होकर आ जाता है.

एसी सिस्टम और वायरिंग की टेस्टिंग रिपोर्ट अनिवार्य होनी चाहिए. – सारी चीजें कागजी है.

ड्राइवर के लिए ये ट्रेनिंग जरूरी है. – ऐसा कोई व्यवस्था नहींफायर सेफ्टी ड्रिल होना चाहिए. आग लगने की स्थिति में तुरंत बचाव कैसे करें, इसकी ट्रेनिंग हो. -ऐसी व्यवस्था नहीं होती है.

फर्स्ट एड ज्ञान होना चाहिए. प्राथमिक इलाज और घायलों की मदद के उपाय हो. – यह इंतजाम नहीं है.

थकान प्रबंधन पर प्रकाश डालना है. लंबी यात्राओं में ड्राइवर रोटेशन और अनिवार्य विश्राम मिलना चाहिए. – एक ही ड्राइवर आना और जाना करते हैं.

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Author: RAJESH SINGH

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