Jamshedpur News :
बारीडीह में सोमवार को कोल्हान के हो साहित्यकार डोबरो बुड़ीउली को सम्मानित किया गया. आदिवासी हो समाज की ओर से उन्हें अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया. मौके पर डोबरो बुड़ीउली ने अपने संबोधन में कहा कि हो भाषा की पहचान अब राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हो रही है. इसका सारा श्रेय समाज के उनलोगों को जाता है, जो अपनी मातृभाषा का व्यवहार करते हैं. साथ ही अपनी मातृभाषा की लिपि वारंगक्षिति में पठन-पाठन करते हैं. इसका श्रेय विशेषकर समाज के उन युवा साहित्यकारों को भी जाता है, जो वारंगक्षिति लिपि में साहित्य का सृजन कर रहे हैं और लोगों को अपनी मातृभाषा की महत्ता से रूबरू करा रहे हैं. उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में हो भाषा भी भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल होगा और हो भाषा को संवैधानिक पहचान मिलेगी. इस अवसर पर सोनाराम बोदरा, काशराय कुदादा, श्याम चंद्र बोदरा, कालेश्वर बोदरा, देवेंद्र बिरुवा, महेश सुंडी, संतोष पूर्ति, नरसिंह बुड़ीउली, दीपक बुड़ीउली, सुमनलता बोदरा आदि उपस्थित थे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
