Jamshedpur News : गायनिक विभाग का ओटी दूसरे दिन भी बंद, मरीजों को सदर अस्पताल में किया जा रहा रेफर

मेडिकल बिल्डिंग में चल रहे गायनिक विभाग की दीवार में दरार आने के कारण विभाग को पूरी तरह असुरक्षित घोषित कर दिया गया है, जिससे ऑपरेशन थिएटर (ओटी) दूसरे दिन भी बंद रहा और किसी भी मरीज को भर्ती नहीं किया गया.

गायनिक के मरीजों को पीजी बिल्डिंग में किया गया शिफ्ट, गर्मी से परेशान हैं मरीज

Jamshedpur News :

एमजीएम अस्पताल में हुए हादसे के तीसरे दिन भी अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल रहा. मेडिकल बिल्डिंग में चल रहे गायनिक विभाग की दीवार में दरार आने के कारण विभाग को पूरी तरह असुरक्षित घोषित कर दिया गया है, जिससे ऑपरेशन थिएटर (ओटी) दूसरे दिन भी बंद रहा और किसी भी मरीज को भर्ती नहीं किया गया. इस कारण प्रसव के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं को सदर अस्पताल रेफर किया जा रहा है. सोमवार को 13 से अधिक मरीजों को रेफर किया गया, जिनमें पांच को सर्जरी की आवश्यकता थी. सुरक्षा को लेकर गायनिक विभाग के सभी मरीजों को पीजी बिल्डिंग के दूसरे तल्ले पर शिफ्ट कर दिया गया है. जगह की कमी के कारण प्रसूता, गर्भवती और अन्य मरीजों को एक साथ वार्ड, बरामदे और अन्य उपलब्ध स्थानों पर बेड लगाकर भर्ती किया गया है.

गर्मी से मरीज परेशान

गर्मी के कारण वहां स्थिति और भी गंभीर हो गयी है. पीजी बिल्डिंग में अधिकतर जगहों पर पंखे नहीं हैं, जिससे मरीज और उनके परिजन परेशान हैं. गर्भवती महिलाएं हाथ में पंखा लेकर गर्मी से राहत पाने की कोशिश कर रही हैं, वहीं नवजातों को परिजन गोद में लेकर बरामदे में टहलते नजर आये. चिकित्सकों ने नवजातों को गर्मी और भीड़ से बचाने की सलाह दी है, ताकि उन्हें लू या संक्रमण न हो.

एमजीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आरके मंधान ने बताया कि जब तक गायनिक विभाग को नये भवन में शिफ्ट नहीं किया जाता, तब तक गर्भवती महिलाओं का ऑपरेशन सर्जरी विभाग के ओटी में किया जायेगा. इसके लिए तैयारियां की जा रही है.

सदर अस्पताल में बढ़ी भीड़

वहीं, सदर अस्पताल के गायनिक ओटी पर दबाव बढ़ गया है. सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने बताया कि स्थिति को देखते हुए ओटी को 24 घंटे खुला रखा जा रहा है और सभी डॉक्टरों व कर्मचारियों को समय पर उपस्थित रहने के निर्देश दिये गये हैं. दवा और जरूरी सामान की व्यवस्था भी कर दी गयी है. साथ ही एमजीएम से डॉक्टरों की अतिरिक्त व्यवस्था करने को कहा गया है, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो.

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Author: RAJESH SINGH

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