Jamshedpur news. राजनीतिक लाभ के लिए रोहिंग्या-बांग्लादेशी मुसलमानों को झारखंड में बसा कर डेमोग्राफी से छेड़छाड़ कर रही है हेमंत सरकार : बाबूलाल मरांडी

शराब घोटाले में सीबीआइ जांच की आंच झारखंड के मुख्यमंत्री तक नहीं पहुंचे, इसलिए एसीबी को किया गया आगे, बचने के लिए अधिकारी को फंसाया : पूर्व मुख्यमंत्री

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भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सह नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हेमंत सरकार राजनीतिक लाभ के तहत सुनियोजित तरीके से रोहिंग्या-बांग्लादेशियों को हर तरह की सरकारी सुविधा प्रदान कर झारखंड की डेमोग्राफी को बर्बाद करने में तुली है. फर्जी आधार कार्ड, वोटर कार्ड के सहारे अब यह रोहिंग्या-बांग्लादेशी मुसलमान झारखंड में मंईयां सम्मान योजना के अलावा उन सभी सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं, जिन्हें आदिवासी-मूलवासियों के लिए चालू किया गया है. हालात यही रहे, तो वह दिन दूर नहीं, जब यहां आदिवासी-मूलवासियों की संख्या अल्पसंख्यक हो जायेगी. रोहिंग्या-बांग्लादेशी मुसलमानों को सरकार के समर्थन का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं कि इनके द्वारा पूर्वी सिंहभूम समेत राज्य के अन्य जिलों में फर्जी तरीके जन्म प्रमाण पत्र बनाये जा रहे हैं, जिन पंचायत-टोला में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं है, वहां से सैकड़ों की संख्या में महिलाएं मंईयां सम्मान योजना का लाभ उठा रही हैं. श्री मरांडी ने कहा कि पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन से वे मांग करते हैं कि जल्द एक एसआइटी का गठन कर गंभीरता से इसकी जांच करें. सर्किट हाउस में गुरुवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री मरांडी ने कहा कि मामले अब पकड़ में आने लगे हैं, जबकि भाजपा इन्हें विगत कई वर्षो से उठाती आ रही है.

केंद्र से रोहिंग्या-बांग्लादेशी मुसलमानों को गिरफ्तार करने का है आदेश

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि केंद्र के गृहमंत्रालय ने झारखंड समेत सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि वे अभियान चलाकर रोहिंग्या-बांग्लादेशी मुसलमानों को गिरफ्तार करें. कई राज्यों ने अभियान शुरू कर दिया है, लेकिन झारखंड सरकार इन्हें बचाने और सरकारी सुविधाएं प्रदान करने में लगी हुई है. यह बदलाव प्राकृतिक नहीं, बल्कि एक योजनाबद्ध प्रयास है, विशेषकर झारखंड में जहां एक धर्म विशेष की आबादी को बढ़ाने का कार्य फर्जी जन्म प्रमाण पत्रों और अवैध घुसपैठ के माध्यम से किया जा रहा है. बाबूलाल मरांडी ने चिंता जताई कि बांग्लादेश जैसे देशों से लोग मालदा व मुर्शिदाबाद आते हैं फिर झारखंड राज्य में अवैध तरीके से घुसपैठ कर रहे हैं. पहले यह पूर्वोत्तर में दिखा और अब झारखंड जैसे राज्यों में जनसंख्या संतुलन को बिगाड़ रहे हैं.

पूर्व मुखयमंत्री बाबूलाल मरांडी ने भारत की जनगणना के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 1951 में आदिवासी आबादी 35.38 प्रतिशत, दलित आबादी 8.41 प्रतिशत, ईसाई आबादी 4.12 प्रतिशत, मुस्लिम आबादी 8.9 प्रतिशत और सनातनी (हिंदू सहित) आबादी 87.79 प्रतिशत थी. 1991 में आदिवासियों की आबादी घटकर 26.36 प्रतिशत, दलितों की आबादी अन्य जातियों के साथ बढ़कर 11.84 प्रतिशत, ईसाई आबादी 4.6 प्रतिशत, मुस्लिम आबादी 13.85 प्रतिशत और सनातनी आबादी घटकर 82.9 प्रतिशत रह गयी. 2011 की जनगणना में आदिवासी आबादी और घटकर 26.20 प्रतिशत, दलित आबादी 12.80 प्रतिशत, ईसाई आबादी 4.30 प्रतिशत, मुस्लिम आबादी 14.53 प्रतिशत और सनातनी (हिंदू सहित) आबादी 81.17 प्रतिशत पर सिमट गयी है.

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य में हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्री बनने के बाद भ्रष्टाचार में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है. उनकी चेतावनी को नजरअंदाज कर सरकार ने अपने मनमुताबिक चार कंपनियों को ठेके दिये. अब छत्तीसगढ़ सरकार ने सीबीआइ को जांच सौंपी, जिससे स्पष्ट है कि इसकी आंच झारखंड तक जायेगी और मुख्यमंत्री की संलिप्तता भी उजागर होगी. इसी डर से सीबीआइ की जांच से पहले ही एसीबी के माध्यम से विनय चौबे को गिरफ्तार करा दिया गया. श्री मरांडी ने कहा कि एसीबी के डीजी फिलहाल वही अधिकारी हैं, जिनका डीजीपी कार्यकाल 30 अप्रैल को समाप्त हो चुका है और अब झारखंड में न तो स्थायी डीजीपी हैं, न ही वैध एसीबी का डीजी. इडी की जांच में दो सीओ गवाह बने थे, तो झारखंड सरकार ने उनके घर छापेमारी कर डराने का प्रयास किया, ताकि गवाहों को चुप कराया जा सके. यह तरीका भी भ्रष्टाचार को छिपाने और सीबीआइ जांच से बचने का प्रयास है. इस दौरान प्रदेश मंत्री नंदजी प्रसाद, अध्यक्ष सुधांशु ओझा एवं मीडिया प्रभारी प्रेम झा मौजूद रहे.

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Published by: Pradip chandra keshav

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