झारसुगुड़ा: झारसुगुड़ा स्थित एमसीएल ऑडिटोरियम में जिला परिषद की ओर से जिला स्तरीय पंच सम्मेलन गुरुवार को आयोजित हुआ. इसका मुख्य उद्देश्य त्रिस्तरीय पंचायतीराज व्यवस्था में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों को वीबी-जी रामजी अधिनियम-2025 के विभिन्न प्रावधानों के बारे में जागरूक करना था.
जिलाधीश कुणाल मोतीराम चव्हाण ने कहा कि ग्रामीण भारत की समृद्धि और सामाजिक कल्याण के लिए वीबी-जी रामजी अधिनियम एक महत्वपूर्ण पहल है. इसके माध्यम से ग्रामीण परिवारों को प्रतिवर्ष 125 दिनों के सुनिश्चित रोजगार के साथ जल संरक्षण, आधारभूत संरचना के विकास और स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण पर विशेष जोर दिया जायेगा.
इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है. इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत अतिरिक्त कार्यकारी अधिकारी (प्रशासन) सूर्यांशु राउत के स्वागत भाषण से हुई. इसके बाद मुख्य विकास एवं कार्यकारी अधिकारी विश्वरंजन नायक ने सम्मेलन के उद्देश्य और रूपरेखा पर प्रकाश डाला.
जिला परिषद की एमसी रूपसिता मिश्रा ने कार्यक्रम का समन्वय किया. लैयकेरा की एपीओ सुनयना बेहेरा, झारसुगुड़ा की एपीओ निवेदिता पंडा तथा किरमिरा की एपीओ रश्मिता भोई ने पावर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से अधिनियम की प्रमुख विशेषताओं की विस्तृत जानकारी दी. ओएलएम की डीपीएम डॉ पुष्पश्री नायक ने कार्यक्रम का संचालन किया.
सम्मेलन में बताया गया कि इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण, आधारभूत ढांचे का विकास, आजीविका संवर्धन तथा प्राकृतिक आपदा प्रबंधन जैसे चार प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जायेगा.
सम्मेलन में जिलाधीश कुणाल मोतीराम चव्हाण के अलावा जिला परिषद अध्यक्ष तुलावती मिंज, मुख्य विकास एवं कार्यकारी अधिकारी विश्वरंजन नायक, कोलाबीरा पंचायत समिति अध्यक्ष भोजराज पटेल, किरमिरा पंचायत समिति उपाध्यक्ष सावित्री माझी, जिला परिषद सदस्य दिगंबर भोई, झरना सागर, नृपलाल प्रसाद तथा रीता बाग सहित जिले के सभी ब्लॉकों के जिला परिषद सदस्य, सरपंच, समिति सदस्य एवं पंचायत प्रतिनिधि उपस्थित थे.
