द ग्रेजुएट स्कूल कॉलेज फॉर वीमेन में दो दिवसीय संगोष्ठी का शुभारंभ
शोधपत्र एवं मिले सुझाव को सरकार करेगी एडॉप्ट
Jamshedpur News :
साकची स्थित द ग्रेजुएट स्कूल कॉलेज फॉर वीमेन के वाणिज्य संकाय की ओर से दो दिवसीय राष्ट्रीय अंतरविषयक संगोष्ठी का शुभारंभ शुक्रवार को हुआ. झारखंड राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद और पंजाब नेशनल सिंध बैंक के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस संगोष्ठी का मुख्य विषय ”भारत में महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक उत्थान में उद्यमिता की भूमिका” है. कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि झारखंड सरकार की ग्रामीण विकास और पंचायती राज्य मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, प्राचार्या डॉ वीणा सिंह प्रियदर्शी व अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया. मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि शहरी क्षेत्रों की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को उद्यम के क्षेत्र में आगे लाना एक बड़ी चुनौती है. उन्होंने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में शिक्षकों की भूमिका को सराहा. कहा कि सरकार द्वारा कई योजनाएं शुरू की गयी हैं, ताकि उद्यमिता के क्षेत्र में महिलाएं आगे आयें. लेकिन इन योजनाओं का लाभ भी सहजता से मिलना जरूरी है. उन्होंने योजना के साथ-साथ महिलाओं को बैंक से मिलने वाले लोन के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि शोधपत्र एवं मिले सुझाव को सरकार एडॉप्ट करेगी, ताकि उद्यमिता के क्षेत्र में महिलाएं आगे आ सकें. संगोष्ठी में कोल्हान विश्वविद्यालय के वाणिज्य संकायाध्यक्ष डॉ मंगला श्रीवास्तव और श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (नई दिल्ली) के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ आलोक कुमार बतौर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे. अतिथियों का स्वागत पौधा व अंगवस्त्र देकर किया गया. इसके बाद कॉलेज की छात्राओं ने कुलगीत प्रस्तुत किया और अतिथियों द्वारा शोध-संक्षेपिका का अनावरण किया गया. प्राचार्या डॉ वीणा सिंह प्रियदर्शी ने कहा कि वर्तमान में महिलाओं को आर्थिक स्वावलंबन की ओर अग्रसर करना जरूरी है, ताकि वे समाज के विकास में भागीदार बन सकें. सेमिनार की आयोजन सचिव डॉ अनुराधा वर्मा ने कहा कि आज नारी हर बंधनों को तोड़कर आगे बढ़ रही हैं. मुख्य वक्ता डॉ आलोक कुमार ने कहा कि महिलाओं को किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं आंका जा सकता.
तकनीकी सत्रों में पढ़े गये दर्जनों शोध पत्र
संगोष्ठी के पहले दिन एक मुख्य सत्र और तीन तकनीकी सत्रों का आयोजन हुआ. मुख्य सत्र में प्रो प्रदीपा बनर्जी और डॉ एम एन जुवैरी संसाधन सेवी के रूप में मौजूद रहे. पहले तकनीकी सत्र ””उद्यमिता के माध्यम से महिला सशक्तिकरण” में 20 शोध पत्र, दूसरे सत्र ”डिजिटल इंडिया मिशन: महिला उद्यमियों के लिए अवसर” में करीब 22 शोध पत्र और तीसरे सत्र ”झारखंड में महिला उद्यमी: अवसर व चुनौतियां” में 20 प्रतिभागियों ने अपने शोध पत्र पढ़े.
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