Jamshedpur news.
सिंहभूम चेंबर ऑफ कॉमर्स के उपाध्यक्ष सह वाणिज्य कर मामलों के जानकार अधिवक्ता राजीव अग्रवाल ने झारखंड सरकार से मांग की है कि पुराने मामलों को निपटाने के लिए एक बार फिर से कर समाधान योजना को लाया जाना चाहिए. बजट सत्र के दौरान सरकार इस योजना को फिर से छह माह के लिए लेकर आये, ताकि इसमें पुराने वैट समेत अन्य कई तरह के लंबित मामलों का निष्पादन हो पायेगा. पहले भी सरकार यह योजना लेकर आयी थी, जिसका लाभ सरकार को राजस्व व आमजन को मामले समाप्त करने के रूप में मिला था. कर समाधान योजना से जहां व्यवसायियों के लंबित मामलों का निष्पादन होगा, वहीं राज्य सरकार को टैक्स के रूप में बकाया राशि भी प्राप्त होगी. राजीव अग्रवाल ने कहा कि बजट आते ही चेंबर द्वारा सरकार से मांग की जाती है कि वह पेट्रोल-डीजल को एक जीएसटी में शामिल करे. अभी जीएसटी लग जाये, तो जमशेदपुर में 70 रुपये पेट्रोल-डीजल बिकने लगेगा. फिलहाल पेट्रोलियम उत्पाद पर 67 प्रतिशत से ज्यादा टैक्स है, जिसमें 48 प्रतिशत उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) और 22 प्रतिशत वैट (वैल्यू एडेड टैक्स) है. 22 प्रतिशत टैक्स के साथ एक रुपये सेस भी लगता है, जिसे मिला दिया जाये, तो वैट का टैक्स करीब 25 प्रतिशत हो जाता है. इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि आम आदमी और पेट्रोल-डीजल का विक्रेता मूल कीमत के अनुपात में कितना टैक्स चुका रहा है. यदि जीएसटी लग जायेगा, तो इसकी अधिकतम दर 28 प्रतिशत है. इस हिसाब से कीमत 70 रुपये तक तो निश्चित हो जायेगी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
