सिख दंगा पीड़ितों के लिए झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, गठित हुआ ‘वन मैन कमीशन’, मुआवजे की राह आसान

Jharkhand High Court: 1984 के काले साये से जूझ रहे सिख दंगा पीड़ितों के लिए झारखंड हाईकोर्ट से राहत भरी खबर आई है! रिटायर्ड जस्टिस गौतम कुमार चौधरी अब ‘वन मैन कमीशन’ के जरिये उन दावों की पड़ताल करेंगे, जो दशकों से फाइलों में दबे थे. मुख्य न्यायाधीश एसएम सोनक की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया है.

Jharkhand High Court, जमशेदपुर (संजीव भारद्वाज): झारखंड हाईकोर्ट ने 1984 के सिख दंगा पीड़ितों को मुआवजा दिलाने और संबंधित आपराधिक मामलों की निगरानी के लिए, एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है. कोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस गौतम कुमार चौधरी की अध्यक्षता में ‘वन मैन कमीशन’ का गठन किया है. यह महत्वपूर्ण आदेश मुख्य न्यायाधीश एसएम सोनक और न्यायाधीश राजेश शंकर की खंडपीठ ने जारी किया है. यह निर्णय ऑल इंडिया सिख स्टूडेंट्स फेडरेशन के पूर्वी भारत अध्यक्ष, सतनाम सिंह गंभीर, द्वारा दायर जनहित याचिका पर लंबी सुनवाई के बाद लिया गया है.

नये दावों की निष्पक्ष जांच करेगा कमीशन

नवनियुक्त वन मैन कमीशन, दंगा पीड़ितों द्वारा किए गए नए दावों और उनकी पात्रता की बारीकी से जांच करेगा. जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद, कमीशन अपनी विस्तृत रिपोर्ट सीधे अदालत को सौंपेगा. इसी रिपोर्ट के आधार पर पात्र पीड़ितों को मुआवजे का भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा. अदालत को सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि, राज्य सरकार ने पूर्व में कई पीड़ितों को लाभ दिया है, लेकिन अब भी कई लोग तकनीकी कारणों से मुआवजे से वंचित हैं.

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जस्टिस डीपी सिंह के निधन के बाद हुआ नया गठन

इससे पहले गठित वन मैन कमीशन के अध्यक्ष, जस्टिस डीपी सिंह का 8 मार्च को आकस्मिक निधन हो गया था. उनके निधन के बाद यह महत्वपूर्ण पद रिक्त हो गया था, जिसके कारण पीड़ितों की मुआवजा प्रक्रिया रुक गई थी. इसी शून्यता को भरने और काम में निरंतरता लाने के लिए हाईकोर्ट ने नए सिरे से कमीशन के गठन की जरूरत समझी.

आपराधिक मामलों की भी होगी कड़ी निगरानी

याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट से यह भी पुरजोर मांग की गई थी कि, केवल मुआवजा ही पर्याप्त नहीं है बल्कि दंगे से जुड़े आपराधिक मामलों की भी नियमित मॉनिटरिंग होनी चाहिए. कोर्ट के इस फैसले से अब न केवल आर्थिक सहायता की प्रक्रिया को गति मिलेगी, बल्कि वर्षों से लंबित कानूनी लड़ाइयों की सुनवाई और निगरानी भी सुनिश्चित हो सकेगी.

न्याय की प्रतीक्षा कर रहे परिवारों को मिला संबल

हाईकोर्ट का यह फैसला सिख दंगा पीड़ितों के लिए एक मजबूत संबल माना जा रहा है. इससे लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे सैकड़ों परिवारों को उम्मीद की नई किरण दिखाई दे रही है. अब कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर होने वाली आगे की कार्रवाई से, प्रभावित लोगों को न्याय मिलने की प्रक्रिया काफी तेज होने की संभावना है.

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By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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