खादी केंद्र में अरका जैन यूनिवर्सिटी के छात्रों ने जानी कपड़ा बनाने की कहानी

अरका जैन यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों ने खादी कताई एवं बुनाई केंद्र का दौरा कर स्वदेशी वस्त्र परंपरा और ग्रामीण उद्योगों के महत्व को करीब से समझा.

वरीय संवाददाता, जमशेदपुर

अरका जैन यूनिवर्सिटी के फैशन डिजाइन और अंग्रेजी विभाग के विद्यार्थियों ने "परंपरा से प्रगति" कार्यक्रम के तहत सरायकेला जिले के अमदा स्थित खादी कताई एवं बुनाई केंद्र का शैक्षणिक दौरा किया. यह केंद्र खरसावां से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित है. इस भ्रमण का आयोजन विश्वविद्यालय के भारतीय ज्ञान प्रणाली केंद्र और झारखंड राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के संयुक्त प्रयास से किया गया.

खादी से रूबरू हुए यूनिवर्सिटी के छात्र

विद्यार्थियों ने कपास, रेशम और अन्य प्राकृतिक रेशों से धागा बनाने, कताई, हथकरघा बुनाई और तैयार कपड़े बनाने की पूरी प्रक्रिया को करीब से देखा. खादी बोर्ड के प्रतिनिधि सुनील और अंबिका बाउरी ने विद्यार्थियों को खादी की परंपरा, इसके इतिहास और ग्रामीण उद्योगों के महत्व के बारे में जानकारी दी. सुनील ने बताया कि खादी आज आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय रोजगार का एक बेहतर माध्यम बन रही है.

विश्वविद्यालय के निदेशक सह कुलसचिव अमित कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि इस तरह के अनुभव विद्यार्थियों को भारतीय परंपराओं और नई शिक्षा नीति की सोच से जोड़ते हैं. विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को सिर्फ डिग्री तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाना है.

फैशन डिजाइन के विद्यार्थियों ने पारंपरिक तकनीकों को टिकाऊ फैशन से जोड़ने के तरीकों को समझा, वहीं अंग्रेजी विभाग के विद्यार्थियों ने ग्रामीण जीवन, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक पहलुओं की जानकारी ली.


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By Sandeep

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