Jamshedpur News : 47 घंटे बाद मिला अंकुश का शव, एनडीआरएफ की टीम ने निकाला
Jamshedpur News : बिरसानगर जोन नंबर-4 जेपी रोड निवासी अंकुश कालिंदी (12 वर्ष) का शव बुधवार को 47 घंटे बाद एनडीआरएफ की टीम ने काफी मशक्कत के बाद खोज निकाला.
By RAJESH SINGH | Updated at :
शव देख दहाड़ मारकर रोने लगे परिजन, मां बार-बार हो रही थी बेसुध
सोमवार को भोजपुर घाट पर दोस्तों संग गया था खेलने
Jamshedpur News :
बिरसानगर जोन नंबर-4 जेपी रोड निवासी अंकुश कालिंदी (12 वर्ष) का शव बुधवार को 47 घंटे बाद एनडीआरएफ की टीम ने काफी मशक्कत के बाद खोज निकाला. सुबह करीब 9:30 बजे एनडीआरएफ की टीम पहुंची. करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद दोपहर 12:30 बजे टीम ने शव को नदी से बाहर निकाला. शव देख अंकुश की मां रीना कालिंदी समेत घरवालों का रो-रो कर बुरा हाल था. पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.
सुबह आठ बजे ही घाट पहुंच गये थे घरवाले, विधायक भी थीं मौजूद
बुधवार की सुबह करीब आठ बजे ही घरवाले नदी किनारे पहुंच गये थे. मां रोते-रोते बार-बार बेसुध हो जा रही थी. विधायक पूर्णिमा साहू भी सुबह ही नदी घाट पहुंच गयीं थीं. वह रोती-बिलखती अंकुश की मां रीना कालिंदी को संभाल रहीं थी. एनडीआरएफ की टीम जैसे ही शव लेकर बाहर आयी, रीना कालिंदी चीख-चीखकर रोने लगीं. विधायक पूर्णिमा साहू व अन्य महिलाओं ने उसे संभाला. विधायक ने परिवार को हर संभव मदद का भरोसा दिया.
शव देख घाट पर मौजूद लोगों की आंखें भी भर आयी
दोपहर करीब 12:30 बजे अंकुश कालिंदी का शव लेकर एनडीआरएफ की टीम बाहर निकली. शव देख घरवाले दहाड़ मारकर रोने लगे थे. मां रीना कालिंदी बेटे के शव से लिपटकर रोने लगी. इसके अलावा परिजन व स्थानीय लोगों की भी आंखों से आंसू छलक आये. विधायक पूर्णिमा साहू ने रीना कालिंदी को संभाला. मालूम हो कि गत सोमवार को अंकुश कालिंदी मां से 100 रुपये झालमूढ़ी खाने की बात कहकर लेकर अपने सात दोस्तों के साथ साइकिल से नदी किनारे गया था. जहां खेलने व मोबाइल से फोटो खींचाने के दौरान पैर फिसलने से गहरे पानी में चले जाने से अंकुश डूब गया था. वह तामुड़िया माध्यमिक विद्यालय, बिरसानगर में छठी कक्षा का छात्र था.
डेंजर जोन और पथरीली जगह
जिस स्थल पर अंकुश कालिंदी नदी में डूबा वह काफी खतरनाक स्थल है. एक ओर जमीन से काफी गहरे स्थल पर नदी का बहाव है. नदी तक जाने का रास्ता भी काफी डेंजर है. लेकिन जिला प्रशासन की ओर से ना तो बैरिकेडिंग की गयी है और ना ही किसी तरह का बोर्ड ही लगाया गया है. जिसके कारण बच्चे खेलने कूदने के लिये उक्त स्थल पर अक्सर चले जाते हैं. कुछ दूरी पर ही फिल्टर प्लांट है.
नहीं पहुंचे कोई आला अधिकारी, रोष
अंकुश कालिंदी 26 जनवरी को दोस्तों के साथ खेलने के क्रम में नदी में डूब गया था. लेकिन 48 घंटे बाद भी जिला प्रशासन व पुलिस विभाग का कोई भी आला अधिकारी घटनास्थल पर नहीं पहुंचा. जिसे लेकर मृतक के घरवाले व स्थानीय लोगों में आक्रोश व्याप्त था. परिजनों के अनुसार अमीर घर के लड़के के साथ किसी तरह की घटना होने पर पूरा प्रशासन सक्रिय हो जाता है. लेकिन गरीब घर के बच्चे के डूबने के 48 घंटे बाद भी कोई आला अधिकारी झांकने तक नहीं पहुंचा.
पुलिस प्रशासन ने नहीं दिखायी संवेदनशीलता व तत्परता
अंकुश कालिंदी की मौत मामले में पुलिस-प्रशासन ने सक्रियता नहीं दिखायी. मृतका की मां रीना कालिंदी के अनुसार 26 जनवरी को बेटे के नदी में डूबने की सूचना मिलने के बाद वे लोग बिरसानगर थाना शिकायत करने गये. लेकिन बिरसानगर थाना की पुलिस ने कोई मदद नहीं की. बल्की हमें वहां से लौटा दिया और सिदगोड़ा थाना में शिकायत करने की बात कही. पुलिस ने ना ही तत्परता दिखायी और ना ही संवेदनशीलता. जब हमलोग नदी किनारे तलाशने पहुंचे तो हमारी मदद करने की बजाय पुलिस हमें नदी किनारे से वापस लौटने के लिये दबाव बना रही थी.
पुलिस व प्रशासन की दिखी लापरवाही : विधायक
विधायक पूर्णिमा साहू ने बताया कि अंकुश के मामले में पुलिस व प्रशासन की लापरवाही साफ दिखायी दे रही है. जिस स्थल पर अंकुश नदी में डूबा वह काफी खतरनाक है. बावजूद इसके जिला प्रशासन की ओर से ना तो बैरिकेडिंग की गयी है और ना ही कोई बोर्ड लगाया गया है. इसके अलावा हाल के दिनों में लगातार थाना की पुलिस द्वारा क्षेत्र को लेकर लोगों को परेशान किया जाता है. अंकुश मामले में भी पुलिस ने संवेदनशीलता व तत्परता नहीं दिखायी. इसके अलावा एनडीआरएफ की टीम को बुलाने की प्रक्रिया में भी बदलाव की आवश्यकता है.
कोट:-
सूचना मिलने पर तत्काल पुलिस को कार्रवाई करनी है. अगर बच्चे की मौत के मामले में लापरवाही बरती गई है, तो इसकी जांच करायी जायेगी. दोषी पाये जाने पर कार्रवाई भी होगी.