हवा की गुणवत्ता की जांच पहले 17 और फिर 20 अक्तूबर को की गयी थी
Jamshedpur News :
दीपावली की रौनक में छिपे प्रदूषण के खतरे को अब अनदेखा नहीं किया जा सकता है. वजह है कि दीपावली के दौरान शहर की आबोहवा काफी प्रदूषित हो गयी थी. इस साल पिछले साल के मुकाबले ज्यादा प्रदूषण पाया गया है. झारखंड प्रदूषण बोर्ड ने दो स्थानों पर हवा की गुणवत्ता की जांच पहले 17 अक्तूबर को की थी और फिर 20 अक्तूबर को दीपावली के दिन जांच की थी. इस जांच में कई सारे खतरनाक संकेत सामने आये हैं. तीन शिफ्ट में 17 और 20 अक्तूबर को इसकी टेस्टिंग बिष्टुपुर व्हीकल टेस्ट सेंटर पर की गयी थी, जबकि आदित्यपुर रीजनल ऑफिस के ऊपर भी टेस्टिंग की गयी थी. 24 घंटे हवा की मॉनिटरिंग की गयी थी. इसके तहत बिष्टुपुर व्हीकल टेस्टिंग सेंटर में 17 अक्तूबर को पीएम 2.5 की मात्रा 91.54 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था. वहीं, पीएम 10 की मात्रा 156.15 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर हो गया. दीपावली के दिन 20 अक्तूबर को पीएम 2.5 की मात्रा 141.47 प्रति घन मीटर हो गया था, जबकि पीएम 10 307.64 प्रति घन मीटर हो गया. इसी तरह आदित्यपुर रीजनल ऑफिस के ऊपर 17 अक्तूबर को पीएम 2.5 की मात्रा 83.27 प्रति घन मीटर था, जबकि पीएम 10 की मात्रा 140.41 प्रति घन मीटर था. वहीं, 20 अक्तूबर को पीएम 2.5 की मात्रा 166.53 प्रति घन मीटर हो गया, जबकि पीएम 10 की मात्रा 284.76 प्रति घन मीटर तक पहुंच गया.पिछले साल बारिश के कारण कम था प्रदूषण
झारखंड प्रदूषण बोर्ड के क्षेत्रीय पदाधिकारी जीतेंद्र सिंह ने बताया कि वायु प्रदूषण का लेवल पिछले साल के वनिस्पत इस साल ज्यादा था. पिछले साल दीपावली के दिन ही बारिश हो गयी थी. इस कारण लेवल कम था. यह लेवल इस साल ज्यादा इसलिए था, क्योंकि कोई बारिश दीपावली के आसपास नहीं हुई थी. इसके अलावा बिष्टुपुर इलाके में सबसे ज्यादा प्रदूषण इसलिए भी था, क्योंकि उस दौरान वहां मेला भी लगा था.क्या है पीएम 10 और पीएम 2.5
पर्टिकुलेट मैटर वातावरण में मौजूद ठोस और तरल का मिश्रण है. यह कण इतने छोटे हैं कि सांस के जरिये सीधे फेफड़ों तक पहुंचकर स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं. पीएम 10 के कणों का आकार दस माइक्रो मीटर से कम व्यास का होता है. इसमें धूल, गरदा और धातु के सूक्ष्म कण शामिल होते हैं. पीएम 2.5 हवा में घुलने वाला एक छोटा पदार्थ है. इसका व्यास 2.5 माइक्रो मीटर से कम होता है. पीएम 2.5 का स्तर बढ़ने से धुंध छा जाती है और देखने में समस्या आती है. वायु गुणवत्ता को एक से 100 अंकों तक संतोषजनक माना जाता है. जैसे-जैसे अंक बढ़ते हैं, हवा की गुणवत्ता खराब होती जाती है. 100 से 200 तक ठीक-ठाक, 200 से 300 तक खराब, 300 से 400 तक बहुत खराब तथा 400 से 500 तक खतरनाक माना जाता है, जो स्वास्थ्य मानकों के अनुसार घातक है.एक्यूआइ लेवल 215 तक पहुंच गया
दीपावली के दौरान शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआइ) भी काफी खतरनाक था. एक्यूआइ लेवल 20 अक्तूबर की शाम 6 बजे से 21 अक्तूबर की शाम 6 बजे के बीच अधिकतम 215 तक पहुंच गया था, जबकि न्यूनतम 117 तक था. एक्यूआइ लेवल की जांच सैटेलाइट के माध्यम से दस मानकों के आधार पर किया जाता है. एयर क्वालिटी इंडेक्स के मानकों के अनुसार 0-50 को ‘अच्छा’, 51-100 ‘सामान्य’, 101-200 ‘खराब’, 201-300 ‘अनहेल्दी’, 301-400 ‘बहुत खराब’ और 401-500 ‘गंभीर व खतरनाक’ श्रेणी में रखा जाता है. पिछले साल दीपावली के दिन 145 तक एक्यूआइ गया था.एक्यूआइ का 20 अक्तूबर को शाम 6 से 21 अक्तूबर की शाम 6 बजे तक
शाम 6 बजे-117शाम 7 बजे-121शाम 8 बजे-159रात 9 बजे-179रात 10 बजे-194रात 11 बजे-198रात 12 बजे-18521 अक्तूबर रात 1 बजे-184रात 2 बजे-200सुबह 3 बजे-215सुबह 4 बजे-204सुबह 5 बजे-188सुबह 6 बजे-179सुबह 7 बजे-168सुबह 8 बजे-154सुबह 9 बजे-164सुबह 10 बजे-160सुबह 11 बजे-159दोपहर 12 बजे-140दोपहर 1 बजे-152दोपहर 2 बजे-146दोपहर 3 बजे-138शाम 4 बजे-136शाम 5 बजे-137शाम 6 बजे-152डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
