जमशेदपुर: गोलमुरी थाना क्षेत्र के टुइलाडुंगरी में पूर्व जिला कांग्रेस महामंत्री वसीम खान के आवास में किराये पर करीब 26 साल से रह रहे तीन अफगानी नागरिकों के भारतीय मतदाता सूची में शामिल होने का मामला सामने आया है. तीनों की पहचान आसिफ खान, मोहम्मद असलम और मोहम्मद इब्राहिम के रूप में हुई है. तीनों के नाम जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा क्षेत्र के हिंदुस्तानी संघ स्थित बूथ संख्या 286 की मतदाता सूची में दर्ज थे. एसआइआर के दौरान दस्तावेजों के सत्यापन में मामला सामने आने के बाद निर्वाचन विभाग ने तीनों के नाम मतदाता सूची से हटा दिये हैं. अब उपायुक्त ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिये हैं.
पासपोर्ट सत्यापन में खुला विदेशी होने का राज
एसआइआर के दौरान तीनों ने आधार कार्ड, वोटर आइडी, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस समेत कई दस्तावेज प्रस्तुत किये थे. सत्यापन के बाद दस्तावेजों को चुनाव आयोग के पोर्टल पर अपलोड किया गया. इसके बाद पासपोर्ट सत्यापन कराया गया. जांच में एक व्यक्ति का पासपोर्ट अफगानी नागरिक होने के आधार पर रिजेक्ट किया जा चुका है, जबकि दो अन्य के पासपोर्ट रिजेक्ट करने की प्रक्रिया चल रही है. इसके बाद निर्वाचन विभाग ने तीनों के नाम मतदाता सूची से हटा दिये.
तीन अफगानी नागरक क घर पर लगा था ताला
बुधवार को प्रभात खबर की टीम गोलमुरी के टुइलाडुंगरी स्थित पूर्व जिला कांग्रेस महामंत्री वसीम खान के मकान नंबर 297 पहुंची. तीनों अफगानी नागरिक जिस हिस्से में किराये पर रहते हैं, वहां ताला लगा था.
उनकी मोटरसाइकिल घर के बाहर खड़ी थी. वसीम खान ने बताया कि तीनों करीब 26 साल से उनके मकान में किराये पर रह रहे हैं. इससे पहले वे साकची के आमबगान इलाके में रहते थे. उनके बच्चे भी यहां पढ़ाई कर चुके हैं. उन्होंने बताया कि तीनों कारोबार करते हैं और उनके पास वोटर आइडी, आधार समेत कई दस्तावेज थे, जिसके आधार पर मकान किराये पर दिया गया था.
वसीम खान के अनुसार, तीनों के नाम मतदाता सूची में भी थे और उन्होंने मतदान किया था. आसील खान, मोहम्मद असलम और मोहम्मद इब्राहिम से बातचीत का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका. जानकारी के अनुसार, इनमें से एक के बच्चे ने जन्म प्रमाणपत्र के आधार पर स्कूल में दाखिला लिया और कक्षा आठ तक पढ़ाई की. फिलहाल वह दूसरे राज्य में है.
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पिछले SIR में क्यों नहीं सामने आया मामला?
मामले में अब सबसे अहम सवाल यह है कि अगर तीनों लंबे समय से जमशेदपुर में रह रहे थे और उनके पास भारतीय पहचान से जुड़े कई दस्तावेज थे, तो पिछले SIR अथवा पूर्व के मतदाता सत्यापन में इनकी नागरिकता पर सवाल क्यों नहीं उठा? पहले के सत्यापन में इनके दस्तावेज किस स्तर पर जांचे गये थे और किन आधारों पर इन्हें मतदाता सूची में शामिल रहने दिया गया, इसकी भी पड़ताल जरूरी होगी. जांच कमेटी इस पहलू को भी देख सकती है कि पहले हुए सत्यापन में कहीं कोई चूक तो नहीं हुई.
किसके सहारे बने इतने दस्तावेज, नेटवर्क की भी होगी जांच
तीनों के पास आधार कार्ड, वोटर आइडी, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे दस्तावेज कैसे बने, यह भी जांच का बड़ा विषय है. क्या दस्तावेज बनवाने में किसी स्तर पर लापरवाही हुई या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क था, इसकी जानकारी जुटायी जा रही है. साथ ही यह भी पता लगाया जायेगा कि जमशेदपुर में इन तीनों को दस्तावेज तैयार कराने अथवा मतदाता सूची में नाम शामिल कराने में किसी व्यक्ति या समूह ने मदद की थी या नहीं. फिलहाल किसी व्यक्ति की भूमिका प्रमाणित नहीं हुई है.
एसआइआर के दस्तावेजों की होगी दोबारा जांच
मामले की जांच के लिए धालभूम एसडीओ अर्णव मिश्रा को कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है. कमेटी में कार्यपालक दंडाधिकारी चंद्रजीत सिंह, रवि ठाकुर और जिला खनन पदाधिकारी सतीश नायक को भी शामिल किया गया है. जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि विदेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल है.
अफगानी नागरिक के नाम मतदाता सूची में कैसे आये, कांग्रस‐झामुमो दे जवाब : अभय सिंह
मतदाता सूची में तीन अफगानी नागरिक के नाम होने के मामले को भाजपा ने गंभीरता से उठाया है. बुधवार को भाजपा नेता अभय सिंह ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है. एसआइआर क तहत शहर के अन्य संवेदनशील हिस्सों में भी जांच होनी चाहिये. उन्होंने दावा किया कि पूव विधानसभा चुनाव में 30 हजार से अधिक मुसलिम मतदाता है और धातकीडीह, आजादनगर, साकची, जुगसलाई, मानगो क मुंशी मोहला, घाटिशला व हदीपोखर म जांच होने पर कई पाकिस्तानी, बांग्लादेशी और अफगानी मतदाता सामने आ सकते है. कांग्रेस व झामुमो को इस मामले म जवाब देना चािहए.
मामले में सघन जांच की है जरुरत : फयाज
टुइलाडुंगरी में भाजपा के बीएलओ के रुप में एसआइआर कार्य करने वाले मोहमद फयाज ने गोलमुरी में संदिग्ध मतदाताओं के जांच की मांग की है. उन्होंने कहा कि क्षेत्र में पैस के लेन‐देन का काम करने वाले कई लोग वर्षों से किरायें पर रहते थे, इनमें पाकिस्तानी और अफगानी लोग भी शामिल थे. ऐसे लोग टाटा स्टील समेत अन्य कंपनियों के कमचारियों को ब्याज पर पैसे देते थे. आधार कार्ड बनवाने की प्रक्रिया में बरती गयी ढिलाई का कुछ लोगों ने लाभ उठाया. मोहमद फयाज ने ऐसे मामल की सघन जांच कराने की जरुरत बतायी.
पासपोर्ट रिजेक्ट होने के आधार की भी हो रही जांच
उपायुक्त राजीव रंजन ने बताया कि मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की गयी है. मामले में प्रारंभिक पूछताछ भी की गयी है. तीनों नागरिकों ने बताया है कि उनके पिता अफगानी और माता भारतीय थे. वे लोग वर्षों से यहां रह रहे हैं. उनका पासपोर्ट किस आधार पर रिजेक्ट किया गया, इसकी भी जांच की जा रही है. जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मामले में ठोस जानकारी दी जा सकती है.
वोटर लिस्ट में नाम दर्ज होने से लेकर दस्तावेज बनने तक होगी जांच
धालभूम एसडीओ अर्णव मिश्रा ने बताया कि जांच का मुख्य बिंदु यह है कि विदेशी नागरिक का नाम मतदाता सूची में कैसे दर्ज हुआ और शुरुआती सत्यापन के दौरान यह मामला क्यों नहीं पकड़ा गया. तीन लोगों के दस्तावेज जिले में कैसे बनाये गये और इसमें किन-किन लोगों ने मदद की, इसकी भी जांच की जायेगी. पूरे रिकॉर्ड को खंगाला जायेगा. जांच पूरी होने के बाद कमेटी जल्द अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.
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