आदित्यपुर: आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र में रोजाना 40 हजार लीटर या उससे अधिक पानी की खपत करने वाले प्रतिष्ठानों और संस्थानों को अब पंजीकरण कराना होगा. इसके बावजूद बड़ी संख्या में ऐसे उपभोक्ता अब तक पंजीकरण कराने से बच रहे हैं. इससे नगर निगम को वाटर यूजर्स चार्ज के रूप में करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है.
लाखों लीटर पानी की खपत, शुल्क नाममात्र
नियम के तहत प्रतिदिन 40 हजार लीटर पानी की खपत करने वाले प्रतिष्ठान, औद्योगिक इकाई, सोसायटी, वाणिज्यिक प्रतिष्ठान, निजी और सरकारी संस्थानों को सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के पोर्टल पर पंजीकरण कराना है. नगर निगम के अनुसार कई ऐसे उपभोक्ता लाखों लीटर पानी की खपत कर रहे हैं, लेकिन वाटर यूजर्स चार्ज के रूप में मामूली राशि ही जमा कर रहे हैं.
कई आवासीय सोसायटियों में टैंकर के माध्यम से लाखों लीटर पानी मंगाया जाता है. इस पानी की खपत का कोई शुल्क नगर निगम को नहीं मिल रहा है. इसके अलावा पानी के अवैध कनेक्शन और कनेक्शन में अवैध तरीके से मोटर लगाने के कारण भी व्यवस्था प्रभावित हो रही है. इससे आसपास के दूसरे उपभोक्ताओं को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है.
मीटर लगने से बढ़ सकता है निगम का राजस्व
राजस्व बढ़ाने के लिए राज्य सरकार की ओर से चयनित एजेंसी ने पिछले 10 वर्षों तक इस दिशा में काम किया, लेकिन निगम के अनुसार एजेंसी ने सही तरीके से सर्वे नहीं किया. वैध और अवैध जल संयोजनों की सूची भी समय पर उपलब्ध नहीं करायी गयी. इससे पानी के इस्तेमाल के आधार पर सही शुल्क वसूलने में परेशानी हो रही है.
जानकारों के अनुसार सभी प्रतिष्ठानों, औद्योगिक इकाइयों, सोसायटियों, वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों और संस्थानों में पानी के मीटर लगाये जाने से पानी की वास्तविक खपत का पता चल सकेगा. इससे नगर निगम को वाटर यूजर्स चार्ज के रूप में करोड़ों रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है.
नियम का पालन नहीं करने वाले उपभोक्ताओं का बिजली-पानी कनेक्शन काटने और वित्तीय दंड लगाने की शक्ति भी नगर निगम को प्राप्त है.
