परिवारिक मामलों को सुलझा रहा है न्याय सदन (फोटो डालसा नाम से) (संपादित)

परिवारिक मामलों को सुलझा रहा है न्याय सदन (फोटो डालसा नाम से) (संपादित)- इस साल कोर्ट ने 52 फैमिली केस न्याय सदन में रेफर कियासंवाददाता 4 जमशेदपुर पारिवारिक मामलों के निष्पादन में न्याय सदन काफी कारगर साबित हो रहा है. कोर्ट में आने वाले ज्यादातर पारिवारिक मामले को न्याय सदन में समझौता के माध्यम से […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | April 6, 2016 6:56 PM

परिवारिक मामलों को सुलझा रहा है न्याय सदन (फोटो डालसा नाम से) (संपादित)- इस साल कोर्ट ने 52 फैमिली केस न्याय सदन में रेफर कियासंवाददाता 4 जमशेदपुर पारिवारिक मामलों के निष्पादन में न्याय सदन काफी कारगर साबित हो रहा है. कोर्ट में आने वाले ज्यादातर पारिवारिक मामले को न्याय सदन में समझौता के माध्यम से निपटाये जा रहे हैं. जनवरी 2016 से अप्रैल (अब तक) तक परिवारवाद के 52 मामले को कोर्ट ने न्याय सदन को रेफर किये हैं जिनमें 20 मामले को समझौते के आधार पर निष्पादित कराया जा चुका है. एक मामला का समझौता नहीं हो पाया है. जबकि 31 मामलों में मध्यस्थता की प्रक्रिया पैनल लॉयर्स और मेडिएटरों के द्वारा करायी जा रही है. समय और पैसा की होती है बचत जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव जीके तिवारी ने बताया कि जिला न्यायालय में भी एक मध्यस्थता केंद्र स्थापित किया गया है. इसके तहत मध्यस्थता कर मामले को सुलझाया जाता है. इसके लिए दोनों पक्षकार सहमति से किसी मध्यस्थ (जो अदालत से मान्य हो) को अपना विवाद का निपटारा करने के लिए अधिकृत करते हैं. वह दोनों पक्षों को स्वतंत्र रूप से सुनकर समझौते के लिए मनाने की कोशिश करता है. दोनों पक्ष अगर मान सहमत हो जाते हैं तो समझौते को लिखित तैयार करने के बाद उसे कोर्ट में प्रस्तुत किया जाता है. इस समझौते के आधार पर कोर्ट आदेश पारित कर देता है. इसमें पक्षकारों के बीच विवाद खत्म होने के साथ ही समय और पैसे की बचत होती है. माह – केस निष्पादन रिजेक्ट जनवरी – 1 0 1 0फरवरी – 0 0 0 मार्च – 43 16 01अप्रैल – 08 03 (अब तक) 0 (अब तक) कोट मध्यस्थता कर जिस किसी भी मामल को सुलझाया जाता है. उसमें हार-जीत जैसी बात नहीं होती है. इसमें दोनों पक्षों की जीत होती है. ऐसे में एक परिवार बिखरने से बच जाता है. जीके तिवारी,सचिव, डालसा.