संसद में विद्युत ने उठाया केबुल कंपनी का मुद्दा

जमशेदपुर: सांसद विद्युत वरण महताे ने शुक्रवार काे संसद के शून्यकाल में बंद पड़ी इंकैब इंडस्ट्री लिमिटेड (केबुल कंपनी) का मामला उठाया. उन्हाेंने कहा कि 1921 में जमशेदपुर में स्थापित की गयी यह कंपनी बंद हाे जाने से तीन हजार से अधिक मजदूर बेकार हाे गये हैं. 1952 तक यह कंपनी अग्रणी कंपनी के रूप […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | December 19, 2015 7:48 AM
जमशेदपुर: सांसद विद्युत वरण महताे ने शुक्रवार काे संसद के शून्यकाल में बंद पड़ी इंकैब इंडस्ट्री लिमिटेड (केबुल कंपनी) का मामला उठाया. उन्हाेंने कहा कि 1921 में जमशेदपुर में स्थापित की गयी यह कंपनी बंद हाे जाने से तीन हजार से अधिक मजदूर बेकार हाे गये हैं. 1952 तक यह कंपनी अग्रणी कंपनी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी थी. कंपनी अधिकारियाें के कुप्रबंधन के कारण इसका पतन हाेता गया. इसके बाद कंपनी बीआइएफआर में चली गयी. इसके बाद 2000 में कंपनी काे सिक घाेषित कर दिया गया.
बीआइएफआर ने उक्त कंपनी के पुनरुद्धार के लिए तीन कंपनियों (टाटा स्टील, आरआर केबल आैर पेगासस एसेट् रिकंस्ट्रक्शन) काे आमंत्रित किया. बीआइएफआर ने टाटा स्टील काे अच्छा बीडर माना. बीआइएफआर के इस फैसले के खिलाफ दाेनाें कंपनियाें ने दिल्ली उच्च न्यायालय में अपील दायर की. दिल्ली हाइकाेर्ट ने 25 मई 2015 काे सुनवाई काे बंद कर याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया. तीन हजार कर्मचारियाें काे डेढ़ दशक से वेतन नहीं मिला है.
हेपेटाइटिस के लिए विशेष कदम उठाया जाये
सांसद ने इस दौरान हेपेटाइटिस बी के टीकाकरण का मुद्दा उठाया. उन्हाेंने कहा कि झारखंड के कई ग्रामीण इलाकाें में टीकाकारण का काम बेहतर ढंग से नहीं हाे पाया है. क्या सरकार सस्ते टीका उपाय कर रही है. जिस तरह इस कार्य के लिए दिल्ली काे चुना है, क्या सरकार देश काे चार जाेन बनाकर इसकी राेकथाम के लिए विशेष उपाय करेगी.