रिमांड होम में नाबालिग की मौत के मामले में एफआइआर दर्ज कराने परसुडीह थाना पहुंचे परिजन

जमशेदपुर : घाघीडीह रिमांड होम में 20 सितंबर को नाबालिग की मौत के आरोपियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने परिजन मंगलवार को परसुडीह थाना पहुंचे. नाबालिग के पिता के अनुसार उनके बेटे की जान जिन लोगों के कारण गयी है, उनके खिलाफ मामला दर्ज होना चाहिए. किशोरी, उसके माता-पिता, उलीडीह थानेदार और रिमांड होम के […]

जमशेदपुर : घाघीडीह रिमांड होम में 20 सितंबर को नाबालिग की मौत के आरोपियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने परिजन मंगलवार को परसुडीह थाना पहुंचे. नाबालिग के पिता के अनुसार उनके बेटे की जान जिन लोगों के कारण गयी है, उनके खिलाफ मामला दर्ज होना चाहिए. किशोरी, उसके माता-पिता, उलीडीह थानेदार और रिमांड होम के पदाधिकारी भी दोषी हैं.
उन्होंने बताया कि परसुडीह थाना आने से पहले वे उलीडीह थाना गये, जहां थानेदार ने घटनास्थल परसुडीह थाना क्षेत्र बताते हुए शिकायत लेने से इंकार कर दिया. इसके बाद परिजन परसुडीह थाना आये. परसुडीह थाना में मामले के अनुसंधानकर्ता बीरबल महतो परिजनों की शिकायत सुनने के बजाय उलटे नाबालिग द्वारा आत्महत्या करने की बात दोहराते रहे.
अनुसंधानकर्ता से नाबालिग के माता-पिता व बस्ती के लोग सुसाइडल नोट तथा घटनास्थल पर खींची गयी तस्वीरों को दिखाने का अनुरोध किया, लेकिन उन्होंने जांच पूरी होने तक कुछ भी दिखाने से इंकार कर दिया. एसएसपी से शिकायत के पांच दिन गुजरने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
नाबालिग के परिजनों ने बताया कि रिमांड होम में मौत की घटना के बाद उन्होंने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की एसएसपी से मिलकर लिखित शिकायत की थी. एसएसपी अनूप बिरथरे ने जांच का आदेश डीएसपी पटमदा विजय महतो को दिया, लेकिन पांच दिन गुजरने के बाद भी किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई.
क्या है पूरा मामला
उलीडीह थाना में छह अप्रैल को किशोरी द्वारा दो नाबालिग के खिलाफ दुष्कर्म करने व वीडियो बनाने का मुकदमा दर्ज कराया गया था. पुलिस ने दोनों नाबालिग को गिरफ्तार कर रिमांड होम भेज दिया. एक नाबालिग को अदालत से जमानत मिल चुकी है, वहीं दूसरे की जमानत याचिका पर किसी कारण से सुनवाई नहीं हो पायी. अपने को निर्दोष बताते हुए नाबालिग ने सुनवाई के दौरान भी न्याय की गुहार लगायी. कहीं न्याय नहीं मिलने पर 20 सितंबर की सुबह रिमांड होम में फांसी लगाकर जान दे दी थी.
रिमांड होम में खंगाला गया रिकॉर्ड
नाबालिग की मौत के बाद मामले का रिकॉर्ड मंगलवार को दूसरी न्यायिक दंडाधिकारी ने जांच की. जानकारी के मुताबिक जान देने वाले नाबालिग के अधिवक्ता द्वारा भी रिकॉर्ड की प्रति लेने के लिए कोर्ट में आवेदन दिया गया था. जिसका आवेदन मंगलवार को जिला कोर्ट से रिमांड होम भेजा गया.
जांच करने नाबालिगके घर पहुंचे डीएसपी
जमशेदपुर. रिमांड होम में जान देने वाले नाबालिग के घर मंगलवार की शाम को डीएसपी विजय महतो जांच करने पहुंचे. डीएसपी 20 मिनट तक वहां ठहरे. इस दौरान परिजनों ने डीएसपी को बताया कि पुलिस द्वारा किसी तरह की मदद नहीं मिलने के बाद नाबालिग को रिमांड होम से बाहर निकालने के लिए किशोरी और उसके परिजनों से समझौता करना पड़ा.
थाने से कई बार मेडिकल रिपोर्ट के बारे में पूछा गया, हर बार थाने से रिपोर्ट नहीं आयी है, बोलकर भगा दिया जाता था. अंत में किशोरी पक्ष से पांच लाख रुपये में समझौता हुआ. एक लाख राशि दी गयी और शेष राशि जमीन बेचकर नाबालिग के जमानत मिलने के बाद देने की बात तय हुई थी. डीएसपी को बताया गया कि मुकदमा दर्ज होने के बाद नाबालिग के परिवार वालों को पुलिस द्वारा मांगने के बाद भी किसी तरह के दस्तावेज नहीं दिये गये थे.
साथ ही मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं होने के बाद पुलिस ने धारा हटाने और रिमांड होम में बंद नाबालिग को जमानत मिलने में किसी तरह की मदद नहीं की. पुलिस चाहती तो नाबालिग को जमानत मिल सकती थी. नाबालिग के जमानत अर्जी पर तीन माह तक सुनवाई क्यों रोक कर रखी गयी? यह सवाल भी परिजनों ने डीएसपी के समक्ष उठाया.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >