…अब दिलों में जिंदा रहेंगे फादर मैक्ग्रा

जमशेदपुर : एक्सएलआरआइ के पूर्व निदेशक फादर मैक्ग्रा नहीं रहे. उन्होंने 4 अगस्त को एक्सएलआरआइ परिसर में अंतिम सांस ली. फादर मैक्ग्रा के निधन के बाद सोमवार की सुबह 8 बजे से लेकर 9.30 बजे तक उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया. यहां एक्सएलआरआइ के डायरेक्टर फादर अब्राहम समेत सभी प्रोफेसर, […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | August 8, 2017 10:14 AM
जमशेदपुर : एक्सएलआरआइ के पूर्व निदेशक फादर मैक्ग्रा नहीं रहे. उन्होंने 4 अगस्त को एक्सएलआरआइ परिसर में अंतिम सांस ली. फादर मैक्ग्रा के निधन के बाद सोमवार की सुबह 8 बजे से लेकर 9.30 बजे तक उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया. यहां एक्सएलआरआइ के डायरेक्टर फादर अब्राहम समेत सभी प्रोफेसर, विद्यार्थी, पूर्ववर्ती छात्र-छात्राएं व गैर शैक्षणिक कर्मचारियों ने उनका अंतिम दर्शन किया.

मौके पर हर किसी की आंखें जहां नम थी वहीं एक्सएलआरआइ के अलावा समाज में उनके योगदान को भी याद किया गया. इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को मिस्सा बलिदान के लिए सुबह 10 बजे गोलमुरी स्थित संत जोसेफ कैथेड्रल चर्च लाया गया. यहां सबसे पहले विशप स्वामी फादर फेलिक्स टोप्पो ने उनका गिरिजा स्वागत किया. इस दौरान उन्होंने आशीष दिया अौर कहा कि प्रभु धरती के हर इनसान को अपना आशीष देते हैं. हर कोई प्रभु की संतान है. इसके बाद मिस्सा बलिदान की प्रक्रिया शुरू हुई.

गरीबों को देते थे नि:शुल्क शिक्षा : फादर इ अब्राहम
मिस्सा बलिदान के दौरान सबसे पहले फादर मैक्ग्रा का इंट्रो करवाया गया. एक्सएलआरआइ के डायरेक्टर फादर इ अब्राहम ने फादर मैक्ग्रा के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि फादर मैक्ग्रा का जन्म अमेरिका में हुआ लेकिन उनमें भारत के प्रति अटूट प्रेम था. यही कारण था कि 1949 में अमेरिका से आने के बाद वे यहीं के होकर रह गये. जब फादर मैक्ग्रा अमेरिका से जमशेदपुर आये तो उन्होंने बिजनेस स्कूल को किस प्रकार शुरू किया जाये, विद्यार्थियों को क्या शिक्षा दी जाये ताकि वे काॅरपोरेट वर्ल्ड में बेहतर परफॉर्म कर सकें, इससे संबंधित मॉड्यूल तैयार किया. इस कारण बिजनेस जगत से जुड़े लोग उन्हें कभी नहीं भूल पायेंगे. उन्होंने बताया कि रतन टाटा से लेकर कई मल्टीनेशनल कंपनी से मैनेजर उन्हें आज भी याद करते हैं. उन्होंने कहा कि फादर मैक्ग्रा चाहते थे कि गरीब बच्चे भी पढ़ाई कर सकें .
फादर मैक्ग्रा जानते थे दर्जन भर भाषा : मिस्सा बलिदान के दौरान एक्सएलआरआइ में एथिक्स के हेड फादर अोल्वाल्ड ने कहा कि फादर मैक्ग्रा के साथ उनका गहरा लगाव था. वे जमशेदपुर के अलावा भुवनेश्वर समेत कई स्थानों पर रहे. वे जहां भी जाते वहां की स्थानीय भाषा को सीख लेते. भाषा पर उनकी अच्छी पकड़ थी. करीब दर्जन भर भाषा वे जानते थे. बताया कि भुवनेश्वर में रहने के दौरान उड़िया पर उनकी पकड़ इतनी मजबूत हो गयी थी कि वे उड़िया लिखते भी थे. वे किताब भी लिख चुके थे.
जेसू भवन में दफन किया गया पार्थिव शरीर : संत जोसेफ कैथेड्रल चर्च में मिस्सा बलिदान
के बाद फादर मैक्ग्रा के पार्थिव शरीर को सुबह 11.30 बजे मानगो के जेसू भवन ले जाया गया. यहां जेरोमे कुटिहा ने धन्यवाद ज्ञापन किया अौर अंत में जेसुइट सोसाइटी के प्रोविंसियल जॉर्ज फर्नांडिस ने दफन करने की प्रक्रिया पूरी की. इस मौके पर वीकर जनरल फादर डेविड विन्सेंट समेत ईसाई समुदाय के कई लोग उपस्थित थे.