हजारीबाग. जैविक खेती को प्रोत्साहित करने और रसायनिक खाद व कीटनाशकों पर किसानों की निर्भरता कम करने को लेकर केंद्रीय वर्षाश्रित उपराउं भूमि चावल अनुसंधान केंद्र में तीन नये प्रयोगशाला बन रहे हैं. इन प्रयोगशाला का निर्माण झारखंड सरकार द्वारा राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत किया जा रहा है. प्रत्येक प्रयोगशाला पर 60-60 लाख रुपये खर्च किया जायेगा. यह प्रयोगशाला अगले वर्ष बन कर तैयार हो जायेगा और किसानों के लिए उपलब्ध होगा. प्रस्तावित प्रयोगशाला में मिट्टी जांच प्रयोगशाला, बायो कंट्रोल पैथोलॉजी और बायो कंट्रोल एजेंट एंटोमोलॉजी लैब शामिल हैं. प्रयोगशाला निर्माण के बाद इसके सर्टिफिकेशन के लिए नमूने लखनऊ और दिल्ली भेजे जायेंगे. सर्टिफिकेशन के आधार पर किसानों की जरूरत के अनुसार स्टैंडर्ड क्वालिटी का बायो कंट्रोल एजेंट तैयार कर उपलब्ध कराया जायेगा. साथ ही बाजार में बिक रहे हानिकारक कीटनाशकों की भी जांच की जायेगी.
प्रयोगशालाओं में मिट्टी की गुणवत्ता का अध्ययन
कृषि अनुसंधान केंद्र के मृदा विभाग के वैज्ञानिक प्रभाषचंद्र वर्मा ने बताया कि इन प्रयोगशालाओं के माध्यम से हजारीबाग, रामगढ़, और कोडरमा जिले के मिट्टी स्वास्थ्य का अध्ययन किया जायेगा. पिछले वर्षों में रसायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से मिट्टी में आये बदलाव का विश्लेषण होगा. साथ ही किसानों की मिट्टी की गुणवत्ता को संतुलित रखने के लिए उसके जैविक उपाय के बारे में भी बताया जायेगा.
बायो कंट्रोल एजेंट से फसलों के कीटों पर नियंत्रण
संस्थान के वैज्ञानिक डॉ शिव मंगल प्रसाद ने बताया कि बायो कंट्रोल एजेंट पैथोलॉजी और एंटोमोलॉजी लैब बनने से प्राकृतिक शत्रुओं, लाभकारी जीवाणुओं और परजीवी कीटों का उपयोग कर फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों और रोगों का नियंत्रण होगा. बायो कंट्रोल एजेंट कीटों के जीवन चक्र पर हस्तक्षेप कर उनकी संख्या को नियंत्रित करेंगे. इससे पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्द्धन और मानव स्वास्थ्य के सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा.
