हजारीबाग: आत्म समर्पित नक्सली बंदियों के लिए व्यवसायिक प्रशिक्षण की शुरुआत शुक्रवार से हुई. उदघाटन हजारीबाग डीसी हेमंत सती ने किया. डीसी ने कहा कि समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए आत्म समर्पित नक्सली बंदियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है. जेल से निकलने के बाद वह स्वावलंबी बनेंगे.
अपने परिवार के सदस्यों का भरण पोषण करेंगे. मुर्गी पालन कपड़े की सिलाई बुनाई समेत अन्य कई तरह के व्यावसायिक प्रशिक्षण देने की योजना है. डीसी में आत्म समर्पित बंदियों से अपील किया कि वह प्रशिक्षण में भाग लें और मन लगाकर प्रशिक्षकों से प्रशिक्षण ले.
ओपन जेल का नाम बदलाहजारीबाग स्थित ओपन जेल 18 नवंबर 2013 को खुला था. इसमें आत्म समर्पित नक्सली बंदियों को रखे जाते है. अब इस जेल को ओपन जेल से आत्म समर्पित नक्सली रख दिया गया है.
जेल अधीक्षक चंद्रशेखर प्रसाद सुमन ने कहा कि अब ओपन जेल का नाम बदलकर आत्म समर्पित नक्सली कारा रखा गया है. इस कारा में रहनेवाले बंदियों को स्वालंबी बनाने के उद्देश्य से विभिन्न तरह के व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है. अब आत्म समर्पित बंदी अपने परिवार का सहारा बनेंगे. जेल अधीक्षक ने कहा कि जन कल्याण संस्था को नक्सली बंदियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण देने का जिम्मेवारी दी गयी है.
