चौपारण में खुलेआम हो रही है बालू की तस्करी

प्रखंड़ प्रशासन की चुप्पी और राजनीतिक उदासीनता का लाभ बिचौलियों का बड़ा तबका उठा रहा है. पहले सूर्यास्त के बाद यह कारोबार शुरू होता था, जो रात भर चलता था.

चौपारण़ प्रखंड़ प्रशासन की चुप्पी और राजनीतिक उदासीनता का लाभ बिचौलियों का बड़ा तबका उठा रहा है. पहले सूर्यास्त के बाद यह कारोबार शुरू होता था, जो रात भर चलता था. लेकिन अब दिन के उजाले में खुलेआम बालू की तस्करी हो रही है. एनएच-टू स्थित चोरदाहा बॉर्डर, भगहर के ढाढर नदी, पेटादरी नदी व बराकर नदी से बालू की तस्करी हो रही है. बालू की तस्करी अधिक होने से नदियों का अस्तित्व संकट में आ गया है. इन नदियों से आये दिन सैकड़ों ट्रैक्टर व हाइवा गाड़ी से बालू की तस्करी हो रही है. चौपारण में एक हजार रुपये प्रत्येक ट्रैक्टर के दर से मिलने वाला बालू इन दिनों तीन हजार से 3500 रुपये में बिक रहा है. कभी-कभार प्रशासन अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए दो-चार बालू से भरे ट्रैक्टर पकड़ता है, फिर चुप्पी साध लेता है. इसका लाभ बालू व्यवसाय से जुड़े बिचौलिये उठा रहे हैं. इतना ही नहीं, प्रशासन के रोड पर निकलने की सूचना पूर्व में ही बालू तस्करों को मिल जाती है. प्रखंड़ में बालू का एक भी घाट नहीं है. क्षेत्र में बालू उठाव का सुरक्षित भगहर रूट को माना जाता है. बिहार और झारखंड की सीमा पर स्थित ढाढर नदी से प्रत्येक दिन सौ ट्रैक्टर से अधिक की अवैध रूप से बालू की ढुलाई की जा रही है. भगहर पंचायत के लगभग डेढ़ दर्जन तथा अन्य इलाकों के बीस ट्रैक्टर इस काम में लगे हैं. 2023 में तत्कालीन सीओ प्रेमचंद सिन्हा ने जिला प्रशासन को ढाढर नदी को बालू घाट बनाने का सुझाव दिया था. हालांकि, वन विभाग द्वारा आपत्ति जताने के कारण यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया. इससे सरकार को लाखों रुपये राजस्व का नुकसान हो रहा है. इस संबंध में पूछने पर सीओ संजय कुमार यादव ने कहा कि मैं किसी तस्कर को नहीं जानता हूं. प्रशासन द्वारा लगातार बालू तस्करों पर शिकंजा कसा जा रहा है. बालू से भरे कई ट्रैक्टर को पकड़ कर थाना और खनन विभाग को कार्रवाई के लिए सौंपा गया है.

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Published by: Praveen

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