हजारीबाग. एडवोकेट एक्ट 1961 में संशोधन कर अधिवक्ताओं को अपने नियंत्रण में करने के लिए अधिवक्ता संशोधन अधिनियम 2025 संसद में पेश करने की योजना लगभग तैयार हो गयी है. इस अधिनियम का विरोध सीपीआइएम जिला सचिव गणेश कुमार सीटू ने किया है. उन्होंने कहा है कि नया कानून आने से बार काउंसिल में केंद्र सरकार का सीधा दखल होने लगेगा. नये कानून के मुताबिक बार काउंसिल के तीन सदस्यों को केंद्र सरकार द्वारा नामित किया जायेगा. जिससे कोई अधिवक्ता हड़ताल नहीं करेंगे, कार्य में बाधा नहीं डालेंगे, न्यायालय का बहिष्कार नहीं कर पायेंगे. उन्होंने कहा कि प्रस्तावित संशोधन अधिनियम की धारा 26 ए में अधिवक्ताओं के व्यवहार की जांच करने के लिए एक कमेटी बनायी जायेगी. श्री सीटू ने कहा कि यदि यह संशोधन पास हो जाता है, तो वकीलों की स्वतंत्रता खतरे में आ जायेगी. वह केंद्र सरकार या कोर्ट के गलत कार्यों का विरोध नहीं कर सकेंगे, इसलिए सीपीएम जिला कमेटी इस प्रस्तावित एडवोकेट अमेंडमेंट बिल 2025 का विरोध करती है और इसको वापस लेने की मांग केंद्र सरकार से करती है.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
