चरही के जंगलाें में खूबसरती बिखेर रहे हैं पलाश के फूल

होली में पलाश के फूल से तैयार हर्बल कलर का करते हैं उपयोग

होली में पलाश के फूल से तैयार हर्बल कलर का करते हैं उपयोग

आनंद सोरेन

चरही. चुरचू प्रखंड के चुरचू, आंगो, चनारो, चरही, बहेरा, इंद्रा व हेंदेगढा के जंगलों में पलाश के फूल लोगों को बरबस अपनी ओर आकर्षित करने लगे हैं. आम तौर पर बसंत ऋतु में यह फूल खिलने लगता है. होली के आसपास यह फूल चरम पर आकर अपनी खूबसूरती में चार चांद लगा जाता है.

पलाश के फूल से तैयार होता है प्राकृतिक रंग :

होली का त्योहार आने वाला है और इन दिनों पलाश के फूलों की बहार है. लाल रंग के इस खूबसूरत फूल को लोग होली के कई दिनों पहले से ही पानी में भिगो कर रख देते हैं और फिर उबाल कर इससे रंग बनाते हैं. होली के दौरान गांव के लोग इसी पलाश के फूल से तैयार हर्बल कलर का उपयोग करते है.

औषधीय है पलाश का पेड़ :

पलाश का पेड़ एक औषधीय पेड़ है. इसके पत्ते, फूल और छाल से दवा बनायी जाती है. कई बीमारियों के इलाज में भी यह कारगर साबित है. क्षेत्र के कई गांवों में अब भी पलाश के फूल से बने रंगों से होली खेली जाती है. क्षेत्र के सुदूरवर्ती इलाकों में सदियों से लोग पलाश के फूल से बने रंग से होली खेलते आते रहे हैं.

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By Prabhat Khabar News Desk

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